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पावरग्रिड को दिया 8.24 करोड़ यूडी टैक्स जमा कराने का नोटिस

परिषद का सालाना पांच करोड़ नगरीय कर प्राप्ति का लक्ष्य, अभी तक मिले 47 लाख

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पावरग्रिड को दिया 8.24 करोड़ यूडी टैक्स जमा कराने का नोटिस

पावरग्रिड को दिया 8.24 करोड़ यूडी टैक्स जमा कराने का नोटिस


धर्मेंद्र दीक्षित
भिवाड़ी. नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) को लेकर नगर परिषद ने इस बार बड़ा दांव चला है। अगर नगर परिषद यूडी टैक्स प्राप्त करने में सफल रही तो उसका आर्थिक संकट दूर हो सकता है और भविष्य में परिषद के आय के स्त्रोत खुल सकते हैं। नगर परिषद ने बाइपास स्थित पावरग्रिड कॉर्पोरेशन को ८.२४ करोड़ रुपए का यूडी टैक्स जमा करने का नोटिस दिया है। परिषद ने कॉर्पोरेशन को २००९-१० से २०२२-२३ तक का टैक्स जमा कराने के लिए नोटिस जारी किया है। बाइपास स्थित कॉर्पोरेशन परिसर ४९०४८७ वर्गगज क्षेत्र में फैला है। यहां से विभिन्न शहरों में बिजली आपूर्ति होती है। उक्त क्षेत्र में डीएलसी की दर में भी २००९ से अब तक काफी बढ़ोत्तरी हुई है। २००९ में यहां पर २९७० रुपए की डीएलसी दर थी जो कि अब २४६६५ रुपए हो चुकी है। परिषद के नोटिस अनुसार कॉर्पोरेशन पर १४ वर्ष में ५.७६ करोड़ रुपए का यूडी टैक्स का निर्धारण हुआ है, जबकि २.४८ करोड़ रुपए का जुर्माना लगा है। ३१ मार्च तक एकमुश्त जमा कराने पर जुर्माने में छूट है, वहीं २०११ से पहले के बकाया यूडी टैक्स की मूल राशि पर भी ५० प्रतिशत की छूट चल रही है।
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हमेशा 10 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ लक्ष्य
यूडी टैक्स को लेकर नगर परिषद की स्थिति हमेशा ही चिंताजनक रही है। नगर परिषद ने बजट में यूडी टैक्स से राजस्व प्राप्ति का जो लक्ष्य निर्धारित किया, वह कभी भी प्राप्त नहीं हुआ। बजट में यूडी टैक्स से पांच करोड़ रुपए की आय का अनुमान है, जबकि अभी तक 40 संपत्तियों से सिर्फ 47 लाख रुपए ही प्राप्त हुए हैं। परिषद को गत वर्ष में भी इसी हिसाब से टैक्स प्राप्त होता है। क्षेत्र में नगरीय कर जमा कराने वाले वही उपभोक्ता हैं जिन्हें कि विभिन्न प्रकार की एनओसी सहित अन्य जरूरी काम के लिए दस्तावेज की जरूरत होती है।
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परिषद की नहीं जा रही नजर
कॉर्पोरेशन को 8.24 करोड़ का नोटिस देकर परिषद ने खजाने को भरने का अच्छा मौका खोजा है लेकिन भिवाड़ी में इस तरह का राजस्व जमा कराने वाली संपत्तियों की कोई कमी नहीं है। बड़ी संख्या में मजदूर कॉलोनी, व्यावसायिक परिसर सहित अन्य संपत्तियां बिना किसी प्रकार का कर जमा कराए हर साल करोड़ों रुपए का हिसाब-किताब कर रहीं हैं। इन पर परिषद की अभी तक नजर नहीं पड़ी है। इन संपत्तियों से नियमित राजस्व प्राप्त होने पर या यूडी टैक्स के दायरे में आने पर परिषद आय के मामले में आत्मनिर्भर बन सकती है।
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जो संपत्ति नगरीय कर के दायरे में आएगी, उससे परिषद स्थापना के समय से टैक्स लिया जाएगा। कॉर्पोरेशन को भी इसी हिसाब से नोटिस दिया गया है। जल्द ही एक एजेंसी को यूडी टैक्स का सर्वे कराने के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
रामकिशोर मेहता, आयुक्त, नगर परिषद