
जलभराव दूर करने, एसटीपी से सारेखुर्द बांध जाएगा शोधित पानी
भिवाड़ी. नव निर्मित 34 एमएलडी क्षमता के एसटीपी से शोधित पानी सारेखुर्द बांध जाएगा। शुरुआत में जब नगर परिषद ने प्रोजेक्ट तैयार किया था, तब ग्वाल्दा में पानी ले जाने की योजना थी, अब उसमें बदलाव किया गया है। एसटीपी से शोधित पानी को ले जाने डीपीआर तैयार हो चुकी है। नगर परिषद ने टेंडर भी कर दिया है। 19 किमी लाइन पहले ग्वाल्दा जानी थी, अब उसमें अंतिम छह किमी में बदलाव होना है। छह किमी अलाइनमेंट में बदलाव के लिए फाइल शासन स्तर पर है, वहां से स्वीकृति मिलने के बाद कार्यादेश जारी हो जाएगा और शोधित पानी को ले जाने के लिए लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा।
शोधित पानी को सारेखुर्द बांध में ले जाने जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। करीब दो करोड़ की लागत से नैबकॉन्स कंसल्टेंसी ने डीपीआर तैयार की है जिसमें एसटीपी से 19 किमी लाइन सारेखुर्द बांध जाएगी। लाइन का मार्ग एसटीपी से शुरू होकर मंशा चौक, खिजूरीबास, थड़ा नाला, झिवाना बांध से होकर सारेखुर्द बांध तक रहेगा। बारिश में धारूहेड़ा तिराहे पर होने वाले जलभराव को दूर करने के लिए, बायपास से एसटीपी तक करीब ढाई किमी लाइन भी बिछाई जाएगी, इससे कि जलभराव को दूर किया जा सके। एसटीपी से सारेखुर्द बांध की ऊचाई करीब 45 मीटर है इसलिए शोधित पानी को भेजने के लिए पंपिंग करनी पड़ेगी। डीपीआर करीब 95 करोड़ रुपए की तैयार हुई थी, इसमें लाइन बिछाने के साथ ही नाले और बांध की मरम्मत का कार्य भी शामिल था। अब 52 करोड़ का टेंडर कार्यादेश जारी होगा क्योंकि बांध मरम्मत के काम को फिलहाल प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया गया है। शोधित लाइन की क्षमता प्रतिदिन 34 एमएलडी पानी भेजने की रहेगी। लाइन का व्यास 700 एमएम का रहेगा।
एसटीपी से सारेखुर्द बांध ले जाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का रूट तैयार हो गया है। इसमें बीच में पडऩे वाले थड़ा नाले, झिवाना बांध में भी जरूरत अनुसार पानी छोड़ा जाएगा। पानी पंप के जरिए भेजा जाएगा। नगर परिषद एसटीपी के साथ लाइन से पानी भेजने के लिए दस साल का ओएंडएम कार्यदायी एजेंसी को करना होगा। है।
अभी तक धारूहेड़ा तिराहा बायपास पर बारिश होने पर निकासी के लिए उक्त एसटीपी को विकल्प के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसलिए बायपास से एसटीपी तक बारिश का पानी ले जाने लाइन डाली जाएगी लेकिन एसटीपी से जाने वाली लाइन की क्षमता सिर्फ प्लांट के अनुसार है। भविष्य में प्लांट का पूरी क्षमता में उपयोग होने पर बारिश के पानी को भेजना संभव नहीं होगा। जानकारों का मानना है कि बारिश का पानी धारूहेड़ा होकर मसानी बैराज जाएगा, इसलिए हाल फिलहाल के लिए बारिश के पानी को भेजने का विकल्प रखा गया है, भविष्य में जरूरत नहीं पड़ेगी।
बायपास सहित भगत सिंह कॉलोनी में बारिश से होने वाले जलभराव को दूर करने मसानी बैराज तक पानी ले जाने की योजना है। छह जनवरी को केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था। इसके लिए छह किमी लंबी डे्रन तैयार की जाएगी। जिसकी अनुमानित लागत करीब 150 करोड़ रुपए होगी, जिसमें 25-25 करोड़ राजस्थान और हरियाणा सरकार देगी, शेष राशि एनएचएआई वहन करेगी।
Published on:
26 May 2026 06:42 pm
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