23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीईटीपी निर्माण की धीमी प्रक्रिया, शाहड़ौद गांव के खेतों में भरता है इकाइयों का दूषित पानी

भूजल हो रहा दूषित, ग्रामीण पेयजल के लिए भी परेशान

2 min read
Google source verification
सीईटीपी निर्माण की धीमी प्रक्रिया, शाहड़ौद गांव के खेतों में भरता है इकाइयों का दूषित पानी

सीईटीपी निर्माण की धीमी प्रक्रिया, शाहड़ौद गांव के खेतों में भरता है इकाइयों का दूषित पानी


भिवाड़ी. शाहड़ौद गांव में प्रस्तावित सीईटीपी निर्माण में जैसे-जैसे देरी हो रही है, ग्रामीणों का दर्द भी बढ़ता जा रहा है। गांव से लगते खेतों में गंदा पानी भरता है, जिससे भूजल दूषित हो रहा है। कई वर्षों से यहां पर सीईटीपी निर्माण को लेकर प्रक्रिया चल रही है लेकिन अभी तक मामला जमीनी स्तर पर नहीं आया है। जिसकी वजह से चौपानकी, पथरेड़ी की औद्योगिक इकाइयों से निकले दूषित पानी का बहाव शाहड़ौद की तरफ आता है, कई बार खेतों में खड़ी फसल भी दूषित पानी से नष्ट हो जाती है। जमीन से दूषित पानी निकलता है। रीको ने यहां पर आठ एकड़ भूमि चिन्हित की है जिस पर 15२ करोड़ रुपए से सीईटीपी का निर्माण होगा। सीईटीपी में चार औद्योगिक क्षेत्र की 1498 इकाइयों से निकले गंदे पानी का शोधन होगा। पथरेड़ी, चौपानकी, कहरानी में उद्योगों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। छह एमएलडी कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के लिए 15२ करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। सीईटीपी से चौपानकी, कहरानी, बंदापुर और पथरेड़ी की करीब 1498 इकाइयों जुड़ेंगी और इनका पानी शोधित होगा। एक लाइन से गंदा पानी आएगा, दूसरी लाइन से शोधित पानी इकाइयों को जाएगा, जिसे इकाइयों को दोबारा से उपयोग में लेना होगा।
----
बजट में अनुदान भी बढ़ाया
हाल ही में आए बजट में सीईटीपी निर्माण में 50 करोड़ के अनुदान को 50 प्रतिशत बढ़ाकर 75 करोड़ किया गया है। 50 प्रतिशत की सहायता राशि बढ़ाकर भिवाड़ी क्षेत्र की 1498 औद्योगिक इकाइयों के आर्थिक भार को कम किया है। अब आधी राशि उद्यमी और आधी सरकार को लगानी होगी।
----
अभी यह चल रहा है
सीईटीपी एसपीवी अध्यक्ष रामनारायण चौधरी ने बताया कि टेक्निकल इवॉल्यूशन कमेटी (टीईसी) की बैठक हो चुकी है। कमेटी ने कंसल्टेंट से चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। कंसल्टेंट द्वारा उन बिंदुओं की रिपोर्ट जल्द सौंप दी जाएगी। पांच अप्रेल को दोबारा बैठक होगी। कमेटी द्वारा स्वीकृति देने के बाद वित्त विभाग के पास फाइल भेजी जाएगी। आरपीसीबी के मुख्य अभियंता कमेटी के चेयरमेन होते हैं, रीको और उद्योग विभाग के उच्चाधिकारी भी इसके सदस्य हैं।