
मिनी सचिवालय और जलभराव दूर करने का इंतजार बढ़ेगा
भिवाड़ी. आचार संहिता लग चुकी है। इसके साथ ही विकास के नए काम पर ब्रेक लग गया है। लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भिवाड़ी के दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सकेंगे। इनमें से एक है जलभराव को लेकर और दूसरा है मिनी सचिवालय का। क्योंकि जलभराव को लेकर डीपीआर पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है और मिनी सचिवालय का मामला जमीन आवंटन के बाद भी भूल भुलैया में चला गया है।
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जलभराव की डीपीआर नहीं हो सकी फाइनल
भिवाड़ी में जलभराव को दूर करने के लिए सरकार ने बजट 2022-23 बजट में सौ करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसके बाद बीडा ने सवा करोड़ रुपए की ईओआई जारी की। 16 अगस्त 2022 को टीटीआई कंसल्टिंग को डीपीआर तैयार करने कार्यादेश जारी किया। कंपनी ने सर्वे किया, इसके बाद बीडा और विशेषज्ञों के सामने कई बार सर्वे रिपोर्ट पेश की। विशेषज्ञों के सामने करीब आधा दर्जन बार रिपोर्ट रखी जिसमें हर बार कुछ न कुछ खामी मिली। इसके सुधार को लेकर टीम ने बार-बार फील्ड सर्वे किया। जिससे डीपीआर तैयार करने में देर होती गई। हाल ही में जब एजेंसी ने जयपुर में पांच बिंदुओं पर प्रजेंटेशन दिया तो उसमें भी एकराय नहीं बन सकी है। इस इस तरह भिवाड़ी के जलभराव को लेकर इस वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अंतिम निर्णय नहीं हो सकेगा।
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जमीन आवंटन के बाद नहीं कोई हलचल
मिनी सचिवालय के लिए बीडा ने फरवरी में भूमि चिन्हित कर एसडीएम तिजारा को आवंटन पत्र जारी कर दिया है। जमीन आवंटन के छह महीने बीतने के बाद प्रोजेक्ट में कोई हलचल नहीं है। इस दौरान खैरथल-तिजारा को जिला घोषित होने के बाद तो इस मामले को लेकर कोई हलचल नहीं है। विभागीय जानकार भी कह रहे हैं कि खैरथल-तिजारा जिला घोषित होने से मिनी सचिवालय को लेकर स्थानीय और मुख्यालय स्तर पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही है। भिवाड़ी को दूसरे जिले में शामिल होने से इसकी उपयोगिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बीडा ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में शासन से स्वीकृति मिलने के बाद एसडीएम तिजारा को आवंटन पत्र जारी किया था। जमीन आवंटन के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई जानी थी। जमीन आवंटन तक इस मामले को लेकर पैरवी खूब हुई लेकिन इसके बाद मामला शांत है। बजट घोषणा 2022-23 में भिवाड़ी को मिनी सचिवालय की सौगात मिली थी। प्रोजेक्ट की पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता स्तर पर डीपीआर तैयार कराया जाना प्रस्तावित था। उससे पहले जमीन का चिन्हीकरण जरूरी था। बीडा ने मिनी सचिवालय के लिए बाबा मोहनराम परिक्रमा मार्ग पर गांव खिजरपुर को जाने वाली 18 मीटर सडक़ पर 75 हजार वर्गमीटर जमीन (7.5 हेक्टेयर) को चिन्हित किया था।
Published on:
09 Oct 2023 07:31 pm
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