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भिवाड़ी जिला नहीं बनने का है ‘मलाल’, सौगात देगा चुनावी साल!

राजस्थान का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले चहल-पहल भरे औद्योगिक शहर भिवाड़ी को चुनावी नववर्ष 2023 में पुलिस जिले से पूर्णरूपेण जिला बनने की सौगात मिल पाएगी या नहीं। यह राजनीतिक आकाओं की इच्छाशक्ति पर टिकी है। राज्य विधानसभा में 23 जनवरी से शीतकालीन सत्र भी प्रारंभ हो रहा है। चुनावी साल होने से इस बार बजट भी कुछ खास रहने वाला है। बजट से राज्य के किस क्षेत्र व जिले की झोली में कितना क्या आएगा, इसे लेकर सभी को उम्मीदें लगी हुई है। भिवाड़ी के बाशिंदों की अहम उम्मीद यही है कि इसे जिला घोषित किया जाए।

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औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी

औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी

रामकरण कटारिया

भिवाड़ी. राजस्थान का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले चहल-पहल भरे औद्योगिक शहर भिवाड़ी को चुनावी नववर्ष 2023 में पुलिस जिले से पूर्णरूपेण जिला बनने की सौगात मिल पाएगी या नहीं। यह राजनीतिक आकाओं की इच्छाशक्ति पर टिकी है। राज्य विधानसभा में 23 जनवरी से शीतकालीन सत्र भी प्रारंभ हो रहा है। चुनावी साल होने से इस बार बजट भी कुछ खास रहने वाला है। बजट से राज्य के किस क्षेत्र व जिले की झोली में कितना क्या आएगा, इसे लेकर सभी को उम्मीदें लगी हुई है। भिवाड़ी के बाशिंदों की अहम उम्मीद यही है कि इसे जिला घोषित किया जाए। भिवाड़ी गुड?ांव के बाद हॉट डेस्टिनेशन बन चुका है।


भिवाड़ी मेें वैसे जिला लेवल के अधिकारियों की बात करे तो अतिरिक्त जिला कलक्टर व एसपी और यहां लगाए जा चुके हैं। उच्च शिक्षा की दृष्टि से महाविद्यालय भी है। पंचायतराज की सबसे बड़ी इकाई नगर परिषद, नगरपालिकाएं, पंचायत समितियां भी पुलिस जिले के अधीन में हैं। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी यह शामिल है। जिसके चलते एनसीआर से जुड़े अधिकारियों से लेकर सीईओ व रीको के अन्य बड़े अधिकारी भी यहां बैठते हैं। केवल कलक्टर का पद सृजित होना शेष है और यह तब ही संभव है, जब यह जिला बने। जिला बनने के सभी मानक भी यह शहर पूरा कर रहा है। चुनावी साल में ऐसा हुआ तो यह स्वतंत्र जिला बन जाएगा। इसे कलक्टर भी मिल जाएगा और लाइन ऑर्डर इसी के पास आ जाएगा।


जनसंख्या लाख से अधिक, कनेक्टिविटी भी बेहतर
भिवाड़ी की जनसंख्या वर्ष 2011 में करीब 1 लाख 4 हजार 883 थी। जिसमें पुरुषों की 57 और महिलाओं की आबादी 43 प्रतिशत थी। भिवाड़ी शहर का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 800 महिलाएं हैं। यह शहर 5 हजार 300 एकड़ से भी अधिक एरिया में फैल चुका है। अब एक दशक बाद इसमें काफी परिवर्तन आ गया है। कनेक्टिविटी की दृष्टि से यह देश की राजधानी दिल्ली से 70 किमी, जयपुर से 200 किमी, अलवर से 90 किमी, गुड?ांव से 40 किमी और फरीदाबाद से 60 किमी दूर है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-48 (दिल्ली-जयपुर राजमार्ग) से धारूहेड़ा होकर हीरोहोंडा चौक (गुड?ांव) से 50 मिनट में और हवाई अड्डे नई दिल्ली से 70-90 मिनट में पहुंचा जा सकता है। यहां गुड?ांव-सोहना-टौरू-धारूहेड़ा रोड से भी पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन शहर से 26 किमी दक्षिण में रेवाड़ी जंक्शन है। इसके अलावा हरसौली, खैरथल और अलवर रेलवे स्टेशनों से भी जुड़ाव है।


राजस्थान की है कुबेर नगरी
शहर में स्टील मिलों और भट्टियों से लेकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण तक बड़े, मध्यम और छोटे 2 हजार 500 से भी अधिक कारखाने है। उद्योग नगरी होने से राजस्थान को सबसे अधिक राजस्व भी यहीं से मिलता है। यहां तक कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद भिवाड़ी अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशकों की खास पसंद बन चुका है। उद्योग ने यहां की जमीन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया, तो डेवलपर्स की ओर से भी आवास के लिए गगनचुंबी इमारतों के निर्माण कार्य को महत्व दिया जा रहा है।


यूआईटी ने लगाए विकास के पंख
भले ही एक दशक पहले ही इस क्षेत्र में हाइ राइज का दौर शुरू हुआ हो, लेकिन अब यह गुड?ांव के बाद हॉट डेस्टिनेशन बन गया है। अर्बन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (यूआईटी) ने भिवाड़ी योजनाबद्ध विकास करा कर इलाके को गुड?ांव का विकल्प बना दिया है। भिवाड़ी औद्योगिक नगर चारों ओर औद्योगिक केंद्रों से घिरा हुआ है। जिसमें स्वयं भिवाड़ी, खुशकेड़ा, टपूकड़ा, कहरानी, पथरेड़ी, चौपानकी, सलापुर, घटाल सहित आठ एरिया शामिल है। हरियाणा राज्य की सीमा से सटा होने के साथ धारूहेड़ा, मानेसर और राजस्थान का इंडस्ट्रीयल हब नीमराना के भी नजदीक है। खुद भिवाड़ी में सेंट-गोबेन, जगुआर, होंडा, हीरो, रेबैन जैसी नामचीन कंपनियां है। कई इमारते हंै। बिखरी आबादी के साथ सोसायटी कल्चर की जड़े भी यहां गहरी हो चुकी है।