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महिलाएं संभाल रहीं टोल की जिम्मेदारी

महिलाएं व बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। ये निडर होकर अपनी बहादुरी का लोहा मनवा रही हैं। चाहे सेना में भर्ती होकर बॉर्डर की रक्षा करने का दायित्व हों या फिर फाइटर जेट उड़ाना या फिर व्यस्ततम राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर स्थित टोल नाकों को संभालना। हर क्षेत्र में अपना जज्बा दिखा रही हैं।

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 टोल पर पर्ची काटतीं महिला कार्मिक

भिवाड़ी. टोल पर पर्ची काटतीं महिला कार्मिक।

भिवाड़ी. महिलाएं व बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। ये निडर होकर अपनी बहादुरी का लोहा मनवा रही हैं। चाहे सेना में भर्ती होकर बॉर्डर की रक्षा करने का दायित्व हों या फिर फाइटर जेट उड़ाना या फिर व्यस्ततम राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर स्थित टोल नाकों को संभालना। हर क्षेत्र में अपना जज्बा दिखा रही हैं। ऐसा ही यहां भिवाड़ी-अलवर मेगा हाइवे स्थित टोल से गुजरते वाहनों से टोल वसूली की पर्ची काटने से लेकर अन्य जरूरी कार्यों की जिम्मेदारी भी महिला शक्ति की ओर से बखूबी निभाई जा रही हैं।


अलवर-भिवाड़ी मेगा हाइवे स्थित टोल नाकों पर कार्मिकों का वाहन चालकों से विवाद होता रहता था। कभी स्थानीय नागरिक बताकर छूट मांगी जाती थी तो कोई नेता होने की रौब दिखाकर पैसे नहीं देता था। बात-बात पर हो-हंगामा होता था। जो रास्ता एंबुलेंस या अन्य अधिकृत वाहनों के लिए बनाए गए है, वहां से दबंग निकलने की कोशिश करते थे। अलवर-भिवाड़ी मेगा हाइवे स्थित खिजूरीवास टोल और खुशखेड़ा टोल पर पर्ची काटने से लेकर अन्य काम की जिम्मेदारी महिला स्टाफ की ओर से संभाली जा रही हैं और टोल से कोई भी वाहन बिना पर्ची कटाए नहीं निकल पाता। महिला स्टाफ ने जब से यहां कार्यभार संभाला हैं, वाहन चालकों के व्यवहार में भी परिवर्तन आया है और बिना किसी विवाद के टोल कटवाकर वाहन निकाल रहे हैं।


सारे काम संभालती हैं महिलाओं की टीम
अलवर-भिवाड़ी मेगा हाइवे स्थित दोनों टोल पर टोल काटने से लेकर अन्य संबंधित सभी कार्य महिला स्टाफ संभाल रहा है। दोनों टोल पर पर्ची काटने, सुपरविजन और इमरजेंसी वाहनों को रास्ता बताने के लिए महिला स्टाफ तैनात है। सुबह आठ से शाम चार बजे तक यहां महिलाएं कमान संभालती हैं। कंपनी ने सभी महिला कर्मचारियों के आने-जाने और रहने की व्यवस्था भी की हुई है। टोल संचालन कंपनी के एपीएम योगेश शर्मा ने बताया कि भिवाड़ी टोल पर आठ और खुशखेड़ा पर पांच महिला स्टाफ हैं। महिलाएं वैसे भी अपने काम के प्रति काफी समर्पित होती हैं। महिला स्टाफ से वाहन चालक बहस नहीं करते, जबकि पुरुषों के साथ तो मारपीट करने में देर नहीं करते।