
scrap business
भोपाल. कबाड़ समझकर जिसे हम फेंक देते हैं, या कबाड़ी को बेच देते हैं उस वस्तु की कीमत राजधानी के कैटेग्राइज्ड मार्केट में आकर बढ़ जाती है। पुराने शहर में सिंधी कॉलोनी से लगा कबाडख़ाना देखने में स्क्रैप यार्ड की तरह दिखता है। लेकिन इस बाजार में अलग-अलग कारोबार से करीब एक हजार कारोबारी जुड़े हैं। कुछ पुराने वाहनों के स्क्रैप का काम करते हैं तो रद्दी कागज और पुराने अखबार, प्लास्टिक आदि के धंधे में हैं। यहां की करीब 250 दुकानो से सालाना 200 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है।
कैटेग्राइज्ड मार्केट में स्कूटर 2000 रुपए में तो कबाड़ ट्रक एक रुपए तक में खरीदा जाता है। फिर इसे काटकर लोहे या अलग-अलग धातुओं के भाव में थोक में बेच दिया जाता है। बहुत सारे लोग हर दिन मोटरसाइकिल, कार आदि के पार्ट खरीदने भी यहां आते हैं। यानी वाहन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के पाटर्स भी यहां बिकते हैं। टायर, पन्नी, रद्दी, प्लास्टिक का स्क्रैप यहां से फैक्ट्रियों को भेजा जाता है।
पहले जुमेराती में था मार्केट
भोपाल आयरन स्क्रैप संघ के अनुसार 1975 से पहले कबाड़ मार्केट जुमेराती के आसपास संचालित होता था। बाद में कैटेग्राइज्ड मार्केट के नाम से यह सिंधी कालोनी के पास शिफ्ट हो गया।
वाहनों का डिटेल देते हैं थाने में
कारोबारियों के अनुसार स्क्रैप में आने वाली गाडिय़ों का डिटेल रखा जाता है। आरटीओ जिन गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर देता है उसका विवरण दर्ज किया जाता है। जो गाडिय़ां सीधे आती हैं उसका रिकॉर्ड हनुमानगंज थाने में जमा कराया जाता है। जांच पड़ताल के बाद गाड़ी को स्क्रैप किया जाता है।
कबाड़ मार्केट
-दुकानों की संख्या-250
-व्यवसायी-1 हजार
-रोजाना 12 से 15 लाख की बिक्री
-सालाना कारोबार-200 करोड़
क्या कहते हैं व्यापारी
व्यवसायी आरिफ खान ने बताया कि कबाड़ मार्केट में लोग गाडिय़ों के पाटर््स खरीदने आते हैं। पुराने गाडिय़ों के उपयोगी पाट्र्स बिकते हैं। जबकि, राजू कुशवाहा के अनुसार यहां 250 दुकानें हैं। कुछ दुकानदार तो एक दिन में एक-एक लाख रुपए तक का व्यवसाय कर लेते हैं।
Published on:
13 Feb 2023 06:59 pm
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