4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आज भी है सबसे पुराने इत्र की डिमांड, 2000 प्रति 10 ग्राम है कीमत

200 साल पुरानी बॉटल्स जो कि ऊंट के लेदर से बनी हैं जिनमें 100 साल पुराने इत्र को सुरक्षित रखा गया है।

2 min read
Google source verification

image

Alka Jaiswal

Dec 08, 2016

itra

itra


भोपाल। आजकल के बदलते लाइफस्टाइल में जहां एक तरफ युवा डियोडरेंट और परफ्यूम का इस्तमाल करना पसंद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे युवा हैं जो आज भी इत्र लगाना और उसका कलेक्शन करना पसंद करते हैं। इत्र की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वह ना सिर्फ लंबे समय तक कपड़ों को महकाए रखता है बल्कि इससे आसपास की हवा भी महक जाती है।

'सिल्क फैब' नाम के आयोजन में सम्मिलित हुई परवीन अखतर बताती हैं कि इत्र की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह सालों तक खराब नहीं होते हैं। परवीन ने अपने कलेक्शन के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पास 200 साल पुरानी बॉटल्स हैं जो कि ऊंट के लेदर से बनी हैं। इस बॉटल्स में उन्होंने इत्र को सुरक्षित रखा हुआ है। इसके अलावा उनके पास कस्तूरी और उद इत्र है जो कि 100 साल पुराने हैं। इस इत्र की मार्केट में काफी डिमांड है और इनकी कीमत 2000 तोला(10 ग्राम) है।


ओकेशन के अनुसार होता है इत्र का इस्तमाल
अगर हम इत्र के इस्तमाल की बात करें तो इसका यूज़ ओकेशन और व्यक्ति पर निर्भर करता है। जहां एक तरफ लड़कियां कमल, गुलाब, पॉन्ड्स का इत्र पसंद करती हैं, वहीं दूसरी तरफ लड़कों को चंदन, फिरदौस, मस्क के इत्र पसंद आते हैं। अगर हम ओकेशन के अनुसार इत्र के इस्तमाल की बात करें तो पूजा में गुलाब, चंदन, मोगरा और केवड़ा जैसे इत्र का इस्तमाल किया जाता है। मौसम की बात करें तो गर्मियों के मौसम मं गुलाब, मोगरा और चंदन के इत्र का इस्तमाल काफी ठंडक देता है, वहीं सर्दियों में कस्तूरी इत्र शरीर को गरमाहट प्रदान करता है।

इन्होंने बनाया था सबसे पुराना इत्र
इत्र का इतिहास बहुत पुराना है, इसे पुश्तैनी काल से इस्तमाल में लाया जा रहा है। अगर हम सबसे पुराने इत्र की बात करें तो इसका श्रेय जाता है स्व.अब्दुल रहमान और स्व.अब्दुल कलाम को। उनका बनाया गया इत्र आज भी मार्केट में बिकता है। परवीन ने भी 1 साल पहले मस्क इत्र बनाया था जो आजकल यंगस्टर्स के बीच काफी फेमस है।

ये भी पढ़ें

image