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एक साल में एट्रोसिटी एक्ट में 10081 केस दर्ज, सरकार ने 136 करोड़ की राहत राशि बांटी

- 3 माह में एससी-एसटी के 1239 केस निपटे, 35 मामलों में फरियादी ही मुकरे

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तीन तलाक के मामले में जयपुर की अदालत ने दिया बड़ा फैसला

तीन तलाक के मामले में जयपुर की अदालत ने दिया बड़ा फैसला

भोपाल@मनीष कुशवाह

प्रदेश में अनूसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में राज्य सरकार ने एक साल यानी 1 अप्रेल 2021 से 31 मार्च 2022 तक 136.81 करोड़ रुपए की राहत राशि फरियादियों को दी है। इनमें से अनुसूचित जाति के प्रकरणों में 106.83 करोड़ रुपए तो अनुसूचित जनजाति के प्रकरणों में ये राशि 29.98 करोड़ रुपए है।

इधर, इस साल शुरुआती तीन महीनों जनवरी, फरवरी और मार्च में कोर्ट में चल रहे प्रकरणों में से 1239 का निराकरण किया गया, जिसमें से 35 मामलों में फरियादी पक्षविरोधी (मुकरे) हुए और इनमें खात्मा लगा। खास बात है ये वे फरियादी हैं, जिन्हें राहत राशि के रूप में 75 फीसदी तक पैसा दिया जा चुका है। इस दरमियान कोर्ट से 909 आरोपियों को बरी किया गया, 275 दोषी करार दिए गए। वर्ष 2021 में कोर्ट में खात्मा हुए प्रकरणों की संख्या 229 रही।

वर्ष 2022 के तीन महीने में प्रदेशभर में एट्रोसिटी एक्ट में 2679 केस दर्ज हुए हैं। इनमें अनुसूचित जाति के खिलाफ 1955 तो अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए अपराध 724 हैं।

ज्यादा केस जबलपुर में
एट्रोसिटी एक्ट में समझौते की व्यवस्था नहीं है। सरकार ने 2022 में इस एक्ट के तहत राहत राशि के लिए 137 करोड़ का प्रावधान किया है। इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च तक अलग-अलग न्यायालयों में विचाराधीन 1239 प्रकरणों में फैसला आया। सबसे अधिक जबलपुर में 16 फरियादी मुकर गए। अनूपपुर-खरगोन में तीन-तीन, खंडवा, रतलाम, छिंदवाड़ा, बालाघाट में दो-दो तो पन्ना, शिवपुरी, शाजापुर, झाबुआ और रीवा में एक-एक फरियादी पक्षविरोधी हुए हैं।

वर्ष 2021-22 में मुहैया कराई गई राहत राशि-
अपराध : अनुसूचित जाति : अनुसूचित जनजाति
हत्या : 4.95 करोड़ : 2.68 करोड़
हत्या का प्रयास : 2.55 करोड़ : 0.84 करोड़
बलात्कार : 25.91 करेाड़ : 9.85 करोड़
आगजनी : 0.20 करोड़ : 0.07 करोड़
अन्य अपराध : 106.83 करोड़ : 29.98 करोड़
(आंकड़े एक अप्रेल 2021 से 31 मार्च 2022 तक)

वर्ष 2021 में एट्रोसिटी एक्ट में दर्ज कुल अपराधों की संख्या 10081 थी।

अपराध के मुताबिक तीन चरणों में राहत
अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के खिलाफ अपराधों में सरकार अपराध की प्रकृति और गंभीरता के हिसाब से राहत राशि देती है। अधिकतर केस में एफआइआर दर्ज होने पर 25 फीसदी राशि तो चालान होने पर 50 फीसदी और फैसला आने पर शेष 25% राशि फरियादी को देते हैं।