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1200 वर्ष पुरानी वराह प्रतिमा का इतनी खास कि 2.5 करोड़ का बीमा कराया, चार गार्ड दे रहे सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 50 करोड़ से ज्यादा है कीमत, एक साल तक मुबंई के अंतरराष्ट्रीय समारोह में किया जाएगा प्रदर्शित

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भोपाल। विदिशा के संग्रहालय में रखी गई वराह की करीब 1200 वर्ष पुरानी प्रतिमा मुंबई में होने वाले अंतरराष्ट्रीय समारोह में नजर आएगी। प्रदेश से एकमात्र इस प्रतिमा का चयन किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस प्रतिमा की कीमत करीब 50 करोड़ रुपए है। इसका 2.5 करोड़ रुपए का तो बीमा ही कराया गया है। राज्य पुरातत्व विभाग ने एमओयू के साथ चार सशस्त्र गार्ड की सुरक्षा में इसे मुंबई भेजा है।

विशेष लेप खराब होने से बचाएगा
देशभर में द्वितीय स्थान पर इसे चयनित किया गया है। 10-11वीं शताब्दी की इस प्रतिमा को पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भेजा गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय, मुंबई में प्रदर्शित करने महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के विशेषज्ञों के दल ने इस पर एक विशेष लेप को लगाया ताकि तापमान और आद्रर्ता का असर नहीं हो। इसे मुंबई में एक दिसंबर 2023 से 30 नवंबर 2024 तक वहां प्रदर्शित किया जाएगा।

इसे देखने विश्वभर के लोग आएंगे
ब्रिटिश, अमेरिका और जर्मनी से भी आएगी प्रतिमाएंप्रदर्शनी में ब्रिटिश संग्रहालय से 6, जर्मनी संग्रहालय से 5, अमेरिका गेट्टी संग्रहालय से 2, मुंबई संग्रहालय से 3 के साथ ईजिप्ट, ग्रीस, रोम और असरिया और दिल्ली संग्रहालय से एक प्रतिमा को प्रदर्शित किया जाएगा।

33 कोटी देवताओं को उकेरा गया
सुनारी गांव की क्वेटन नदी से करीब एक दशक पूर्व निकली थी। करीब दस साल पहले इसे विदिशा स्थित संग्रहालय लाया गया था। वराह की यह प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर पर उकेरी गई है। इस पर 33 कोटी देवी-देवाओं को अंकित किया गया है। 10-11 वी शताब्दी ई. की यह प्रतिमा अद्भुत है। विष्णु के तीसरे अवतार पशु वराह की है। महाभारत में कहा गया है कि संसार का हित करने के लिए भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया।