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प्रदेश के 13 बांधों का होगा हाइड्रोलिक तकनीक से सर्वे, बांधों में बढ़ती सिल्ट का लगाया जाएगा पता

केंद्र सरकार ने राज्य के 13 बांधों का सर्वे का काम केंद्रीय जल आयोग और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को सौंपा

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भोपाल। केंद्र सरकार देश के प्रमुख 87 बांधों का सर्वे कर इनमें जमा हो रही गाद और रेत को लेकर सर्वे कराने जा रही है। इसमें मध्यप्रदेश के 13 प्रमुख बांधों को शामिल किया गया है। केंद्र ने ये काम केंद्रीय जल आयोग और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को सौंपा है। इसके टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। हाइड्रोलिक तकनीक से सर्वे कर तलछट में जमा हो रही रेत-गाद को पता लगाया जाएगा।इसे लेकर सोमवार को दिल्ली में बैठक भी हुई, जिसमें देश के सभी राज्यों को बुलाया गया। बैठक में राज्यों ने डिसिल्टिंग पर अब तक कामों की रूपरेखा पेश की। मध्यप्रदेश ने बताया कि तवा, बाण सागर, बरगी और इंदिरा सागर से सिल्ट हटाने को लेकर टेंडर जारी किए थे, लेकिन किसी कंपनी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

इन बांधों का सर्वे करेगी केंद्रीय एजेंसियां

केंद्रीय जल आयोग और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण 13 रिजर्व वायर में काम करेगा। इंदौर और दिल्ली में बैठे अफसर इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। हाइड्रोग्राफी के जरिए ये पता लगाया जाएगा कि डैम में कितनी रेत और गाद जमा हो चुकी है। नदी में बहाव के साथ कितनी रेत और गाद आ रही है। इससे आगामी वर्षों में लाइव स्टोरेज और ग्रॉस स्टोरेज में कितनी बदलाव आएगा। इस तकनीक से लाइव स्टोरेज में आए बदलाव से गाद का पता लगाया जाता है। दोनों एजेंसियां गांधी सागर, तवा, बारना, अपर वेनगंगा, कोलार, तिघरा, मोहिनी पीकअप वायर, बरगी, हरसी, बनास सागर, सम्राट अशोक सागर और इंदिरा सागर में सर्वे करेगी।