
किसानों के लिए 736 करोड़ रुपए का ब्याज अनुदान स्वीकृत
भोपाल। प्रदेश के अन्नदाता किसानों का सरकार को समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में कम दिलचस्पी दिखाई। इस साल प्रदेश के महज 14 लाख 62 हजार 278 किसानों ने ही पंजीयन कराया है। पिछले साल 19.81 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। करीब 46 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। हालांकि, इससे बावजूद कई जिलों में गेहूं की जगह चावल वितरण की नौबत आ गई थी। इस बार भी ऐसे ही हालात बन सकते हैं।
30 से 40 प्रतिशत ही पंजीयन हो पाए
सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए एक फरवरी से रजिस्ट्रेशन प्रकि्रया शुरू की थी, जो 5 मार्च तक चली। किसान किस सेंटर पर अपनी उपज बेचना चाहते हैं, किस तारीख को उपज लेकर जाएंगे, यह तय करने की सुविधा किसानों को दी गई थी। इसके लिए प्रदेश में करीब साढ़े तीन हजार केंद्र बनाए गए थे। कई जिलों में तो अनुमान से 30 से 40 प्रतिशत ही पंजीयन हो पाए। कोरोना काल में दो वर्ष पहले सरकार ने 128 लाख मीट्रिक टन की खरीद की थी। उससे पहले 129 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई थी। हालांकि, विभाग के अफसरों का कहना है कि खाद्यान वितरण के लिए 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवश्यकता ही होती है। प्रदेश में अभी गेंहू-चावल का पर्याप्त स्टॉक है। 60 लाख मीट्रिक टीन उपज खरीद का अनुमान है।
समर्थन मूल्य से ज्यादा है बाजार भाव
सरकार ने 2 हजार 125 रुपए समर्थन मूल्य तय किया है, जबकि बाजार में अच्छे गेहूं के 2500 से 3000 तक का भाव मिल रहा है। इस कारण किसानों ने पंजीयन कराने में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। पिछले वर्ष 31 लाख 84 हजार 874 मीट्रिक टन अनाज वितरित किया था। इसमें गेहूं 16 लाख 73 हजार 351 मीट्रिक टन, 34330 मीट्रिक टन मोटा अनाज, 12 लाख 84 हजार 639 मीट्रिक टन चावल और एक लाख 92 हजार 555 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल का वितरण किया था।
Published on:
09 Mar 2023 09:48 pm
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