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Hamidiya Fire Case : हादसे के बाद भय का माहौल, इलाज बीच में ही छोड़ कर बच्चों को ले जा रहे परिजन

अब परिजनों को यह भय भी हो गया है कि उनके बच्चे को यहां अच्छा उपचार भी मिलेगा या नहीं, इसी के चलते वे अपने बच्चे का उपचार बीच में छोड़कर ही उन्हें ले जा रहे हैं।

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भोपाल. हमीदिया अस्पताल में हुए हादसे के बाद अब बच्चों के परिजनों में भय का माहौल नजर आ रहा है। वे जैसे तैसे अपने बच्चों की छुट्टी करवाकर अन्यत्र जा रहे हैं। ताकि उनके जिगर के टुकड़े को अच्छा इलाज मिल जाए। ऐसे में अब अस्पताल में महज आधा दर्जन ही बच्चे शेष बचे हैं।


एक और मासूम ने तोड़ा दम
कमला नेहरू अस्पताल में अग्निकांड के 72 घंटे बाद मृत बच्चों की संख्या बढ़कर अब 14 हो गई है। गुरुवार सुबह एक और मासूम ने दम तोड़ दिया। इधर हादसे के बाद सहमे परिजन अब अस्पताल छोड़ रहे हैं। अब तक कई परिजन अपने बच्चों की या तो छुट्टी करा चुके हैं या दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। हादसे के बाद वार्ड में अब सिर्फ 6 बच्चे ही बचे हैं। इधर, अस्पताल अग्निकांड में सिर्फ चार बच्चों की मौत ही स्वीकार कर रहा है। वहीं पीडियाट्रिक विभाग की एचओडी डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव का कहना है कि हमारे यहां जो बच्चे आते हैं वे सभी हाई रिस्क ही होते हैं। हर रोज दो से तीन बच्चों की मौत हो जाती है।

डरकर छोड़ दिया अस्पताल
होशंगाबाद निवासी रामरतन का बच्चा भी पीडियाट्रिक विभाग में ही एडमिट था। हादसे के दौरान भी वह वहीं एडमिट था। गुरुवार को रामरतन ने अपने बच्चे की छुट्टी करा ली। वार्ड के स्टाफ ने उन्हें छुट्टी देने से मना किया था, लेकिन रामरतन नहीं माना। इसी तरह अब तक 13 परिजन अपने बच्चे ले जा चुके हैं।

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कंपनियों की 16 करोड़ की उधारी, इसलिए नहीं हुआ मेंटेनेंस
हमीदिया अस्पताल में काम कर रही आउटसोर्स कंपनियों का लंबे समय से भुगतान नहीं हुआ है। सिविल वर्क के अलावा, इलेक्ट्रिकल और मशीनरी के मेंटेनेंस के काम में लगी कंपनियों का छह माह पहले तक 16 करोड़ रुपए उधार हमीदिया अस्पताल पर था। वर्तमान में करीब 7 करोड़ रुपए अटका हुआ है। विभागीय अफ सर आज तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए किस काम की राशि विभाग से मिलेगी और किस मद का भुगतान स्वशासी से होगा। वर्तमान में भी बजट की कमी के कारण पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जाने वाले 7-8 करोड़ के काम पेंडिंग हैं। यही कारण है मेंटेंनेस का काम पूरी तरह से नहीं हो रहा।