
15 कलाकारों ने निमाड़ी गीतों पर किया गणगौर नृत्य
भोपाल। भोपाल हाट परिसर में आयोजित राष्ट्रीय खादी उत्सव में शनिवार को निमाड़ी लोक गीतों पर आधारित डांस प्रस्तुति हुई। इस प्रस्तुति को साधना उपाध्याय के निर्देशन में निमाड़ गणगौर लोक कला मंडल खंडवा के 15 नृत्यांगनाओं द्वारा पेश किया गया।
गणगौर नृत्य चैत्र नवरात्रि के समय निमाड़ में सेलिब्रेट किया जाता है। ये नृत्य निमाड़ के साथ मालवा और राजस्थान के भी कई इलाकों में किया जाता है। दो घंटे की इस प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं ने गणगौर, बिदाई नृत्य आदि की प्रस्तुति दी।
इस दौरान कलाकारों ने सोना रूपा का घा घडीला रेश्म लंबी डोर...नानी बाई को मायरो... जैसे गीतों पर लोक नृत्य पेश किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लाला-लाल, बेलिया..., हम भी चलांगा गाडी में बैठांगा... जैसे गीतों पर डांस किया।
लोगों को भा रहे रेशम के आइटम्स
यहां खादी उत्सव में लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा देशभर से आए बुनकर अपने-अपने एग्जीबिट किए हैं। जिसमें यहां रेशम के बने आइटम्स लोगों को भा रहे हैं। इसमें साड़ी, शूट, दुपट्टे, जैकेट जैसे आइटम्स मिल रहे हैं, जो शिल्क से अनाए गए हैं। यहां करीब दर्जनों प्रकार के शिल्क के प्रोडक्ट अवेलेबल हैं। जिसमें कोसा, मलवारी, करी, मंूगा सिल्क आदि हैं।
सबसे महंगा होती है मंूगा सिल्क
यहां रेशम संचानालय की ओर से कई प्रकार के सिल्क प्रोडक्ट लाए गए हैं। जिसमें मूंगा सिल्क के आइटम्स सबसे महंगे हैं। यह सिल्क पहले असम में पाया जाता था लेकिन मप्र सरकार ने इसके प्लांट पचमढ़ी और होशंगाबाद में भी लगाए हैं। यहां इस सिल्क को डेव्हलप किया जाता है। इनकी कीमत हजारों रुपए मीटर में होती है।
22 जिलों में पाया जाता है मलवारी सिल्क
रेशम संचानालय से आए सुनील कुमार पाठक बताते हैं कि मलवारी सिल्क प्रदेश के 22 जिलों में पाया जाता है जो रेशम के कीड़े से तैयार होता है। इसकी कीमत 500 से 600 रुपए मीटर तक होती है। वे बताते हैं कि रेशम विभाग से इस सिल्क को खरीदकर अन्य विभाग अपना प्रोडक्शन तैयार करते हैं।
Published on:
21 Oct 2018 08:22 am
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