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सरकारी सेवा से मोह भंग ! 2 साल में 205 डॉक्टर होंगे बाहर

MP News: 2025 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से 18 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया, जबकि 3 विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली।

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government hospitals प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News:मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों के भवन और स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार तो लगातार हो रहा है, लेकिन इन संस्थानों को संभालने वाले डॉक्टरों की संख्या घटती जा रही है। सरकारी सेवा से डॉक्टरों का मोहभंग अब स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। 2025 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से 18 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया, जबकि 3 विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली।

चिंताजनक बात यह है कि इस्तीफा देने वालों में 13 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। इनके इस्तीफे मंजूर भी हो चुके हैं, जबकि इससे दोगुने आवेदन अभी लंबित बताए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 113 डॉक्टर सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं वर्ष 2026 में 92 डॉक्टर और रिटायर होने वाले हैं, जिनमें 36 विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। यानी दो वर्षों में कुल 205 डॉक्टर सरकारी सेवा से बाहर हो जाएंगे। ऐसे में पहले से डॉक्टरों की कमी झेल रहे अस्पतालों पर इलाज का दबाव और बढऩा तय माना जा रहा है। स्थिति इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि नई नियुक्तियां तेज नहीं हो रही, जिससे अस्पतालों में समस्या बढऩी तय है।

सरकार डॉक्टरों से काम तो लेना चाहती है लेकिन सुविधाएं नहीं दे रही है। पर्याप्त वेतनमान, अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं हैं। इसलिए अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं तो डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ देते हैं। डॉ. राकेश मालवीय, मुख्य संयोजक, मप्र चिकित्सा महासंघ

इसलिए रास नहीं आ रही सरकारी नौकरी

-सरकार दूरदराज के अस्पतालों में डॉक्टरों की पोस्टिंग तो कर देती है लेकिन वहां अस्पतालों में सुविधाएं नहीं है।

-सुविधाओं की कमी में मरीजों को इलाज नहीं मिल पाए तो डॉक्टरों पर कार्रवाई।

-अच्छे अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों के सिर पर ट्रांसफर की तलवार लटकी रहती है।

-वेतन भत्ते भी उतने आकर्षक नहीं हैं जितना सरकारी अस्पतालों में तनाव रहता है।

-विशेषज्ञ सरकारी नौकरी छोड़कर या तो खुद की प्रेक्टिस कर रहे हैं या निजी अस्पतालों में सेवाएं देना पसंद कर रहे हैं। (जैसा कि नाम न छापने की शर्त पर कुछ डॉक्टरों ने बताया।)

2025 में इन विशेषज्ञ डॉक्टरों का इस्तीफा

केवल 2025 में ही 18 डॉक्टरों ने इस्तीफे दिए। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों में डॉ. दीपक कुमार पटेल शिशु रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल नरसिंहपुर, सिंगरौली जिला अस्पताल के सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. नीलम कुमार सोनी, डॉ. पारसनाथ साहू, डॉ. जोशना ठाकुर ईएनटी टीकमगढ़, सिवनी से डॉ. जूही बिसेन खरे, डॉ. प्रियेश रोकड़े शल्य क्रिया और डॉ ऋतु तरवरे स्त्री रोग, डॉ. अमित कुमार साहू दंत विशेषज्ञ सतना, डॉ अरविंद कुमार उइके दंत विशेषज्ञ बालाघाट, डॉ. भानप्रताप अहिरवार मेडिकल बड़वानी, डॉ. पीयूष सूर्यवंशी शिशु रोग नीमच, डॉ बद्री विशाल सिंह मेडिकल विशेषज्ञ सीधी के नाम शामिल हैं।

2024 में भी 5 डॉक्टर छोड़ चुके नौकरी

2024 में भी सरकारी अस्पतालों से पांच डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी। इनमें डॉ. रवीन्द्र ताथोड़ मेडिकल ऑफिसर बारासिवनी (बालाघाट), डॉ. सरिता सिंधारे जिला मलेरिया अधिकारी नीमच, डॉ. गौरव त्रिपाठी शिशु रोग विशेषज्ञ रीवा, डॉ. विजय तुरकर मलेरिया अधिकारी नरसिंहपुर, डॉ रोहित सिंह मेडिकल ऑफिसर बैरागढ़ भोपाल शामिल हैं।