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डैम में डूबे दो भाई, जिंदा करने के लिए बार-बार मुंह से सांस देती रही बहन

स्कूटर से डैम घूमने गए थे तीनों ममेरे-मौसेरे भाई, इकलौते भाई को जिंदा करने के लिए बार-बार मुंह से सांस देती रही बहन

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भोपाल. कलियासोत डैम में डूबने से दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक छात्र बच गया। दोनों ममेरे-मौसरे भाइयों को डूबने से बचाने के लिए वह डैम के टापू पर बने शिव मंदिर में पहुंचा, लेकिन पुजारी के पहुंचने तक दोनों की जान जा चुकी थी। 15 मिनट बाद पहुंची पुलिस, गोताखोर की टीम ने गहराई से शव निकाले।

पुलिस के मुताबिक, इंडस टाउन रतनपुर निवासी 22 वर्षीय सुमित उमरिया पिता भगवानदास मामा के पुत्र इंडस टाउन निवासी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल के 10वीं के छात्र 17 वर्षीय स्पर्श अग्निभोज पिता अजय और मौसी के बेटे गोपाल नगर पिपलानी निवासी 20 वर्षीय ऋतिक बिल्लौरे के साथ कलियासोत डैम पहुंचा था।

ऋतिक और स्पर्श नहाने लगे। स्पर्श डूबने लगा और ऋतिक दिखाई नहीं पड़ा। सुमित ने स्पर्श को पकडऩे की कोशिश की, लेकिन स्पर्श भी डूब गया। घबराया सुमित मदद के लिए शोर मचाता शिव मंदिर के पुजारी सुनील सिंह के पास पहुंचा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

चार बहनों में इकलौता

ऋतिक के पिता प्रदीप का निधन हो चुका है। वह चार बहनों में इकलौता था। उसने 12वीं पास की है। घर का पूरा खर्चा मां निजी काम कर उठा रही हैं। ऋतिक को तैरना आता था। इसलिए वह सबसे पहले पानी में उतर गया था, लेकिन डूब गया।

माता-पिता शादी में गए

स्पर्श दो भाइयों में बड़ा है। माता-पिता महाराष्ट्र में शादी समारोह में गए हैं। पिता अजय एचईजी कंपनी में हैं, मां सुषमा मदर टेरेसा स्कूल इंडस टाउन में शिक्षिका हैं। स्पर्श कार्मल कांवेंट स्कूल रतनपुर में नवीं पास कर दसवीं में गया था।

छह माह से डैम में गोताखोर नहीं

डैम में डूबने से लगातार मौत हो रही है। सबसे अधिक किशोर जान गंवा रहे हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि छह माह से कोई गोताखोर तैनात नहीं रहता। कई बार इसको लेकर नगर निगम के अधिकारियों से पुजारी मांग कर चुके हैं। पुलिस भी शाम को आती है।

बिलख उठी बहन

ऋतिक का शव बाहर आया, तो उसकी बहन आकांक्षा शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। वह अपने भाई को मुंह से सांस देकर जिंदा करने की कोशिश करती रही।

मैंने भाई को बचाने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन बचा नहीं सका मैं पत्थर पर बैठा था। दोनों किनारे नहा रहे थे। वहां कम पानी दिख था। अचानक नजर पड़ी तो ऋतिक नहीं दिखा। पास जाकर देखा तो स्पर्श भी डूब रहा था।

वह मदद के लिए चीख रहा था। मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन पकड़ नहीं पाया। मेरी आंखों के सामने दोनों भाइयों को डैम लील गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तुरंत ही मैं मंदिर पहुंचा। जहां, पुजारी को घटना के बारे में बताया।
- सुमित उमरिया (जैसा पुलिस को बताया)