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R-Day:1949 में आजाद हुआ था भोपाल, पढ़ें रोचक FACT…

इस बीच आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सख्त रवैया अपनाकर नवाब के पास संदेश भेजा कि भोपाल स्वतंत्र नहीं रह सकता।

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Anwar Khan

Jan 24, 2016

(26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर विशेष)

भोपाल। देश 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटा है। आजादी और उसके बाद के कई रोचक किस्से फिर से याद कराए जा रहे हैं। हम सभी को याद है कि देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और 26 जनवरी 1950 को हमारा गणतंत्र अस्तित्व में आया था और इसी दिन हमें पूरी आजादी मिली थी, पर क्या आपको पता है कि देश में होने के बावजूद भोपाल कब आजाद हुआ था?ï शायद नहीं। आइए हम बतातें हैं भोपाल की आजादी से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट...

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ये फैक्ट आपको उस पल की याद दिला देंगे
- देश 1947 को आजाद हुआ था, पर भोपाल इसके ठीक दो साल बाद यानी 1 जून 1949 को आजाद हुआ था। तब भोपाल के बेनजीर ग्राउंड पर भारत का तिरंगा फहराया गया था और यहां विधिवत रूप से भारत सरकार का प्रशासन शुरू हुआ था।

- भोपाल नवाब हमीदुल्ला चाहते थे कि भोपाल जूनागढ़ हैदराबाद के साथ मिलकर पाकिस्तान के साथ एक कॉरीडोर बना ले, सरदार वल्लभ भाई पटेल और विलयीकरण को लेकर सक्रिय सत्याग्रहियों के आगे नवाब की एक नहीं चली।

- आजाद होने पर भी भोपाल में भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया। यहां तक की अगले दो साल तक ऐसी ही स्थिति बनी रही, जिसमें नवाब भारत के आजादी के या सरकार के किसी भी जश्न में कभी शामिल नहीं हुए।

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(भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान)

ऐसे हुआ था हमारा भोपाल आजाद
- मार्च 1948 में नवाब हमीदुल्लाह ने भोपाल के स्वतंत्र रहने की घोषणा कर दी। मई 1948 में नवाब ने भोपाल सरकार का एक मंत्रिमंडल घोषित कर दिया, पर ये इतना आसान नहीं था।

- सियासत के प्रधानमंत्री बने चतुरनारायण मालवीय, पर इन्हें विलयीकरण के सत्याग्रहियों का जबरदस्त विद्रोह झेलना पड़ा।

- इस बीच आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सख्त रवैया अपनाकर नवाब के पास संदेश भेजा कि भोपाल स्वतंत्र नहीं रह सकता।

- 29 जनवरी 1949 को नवाब ने मंत्रिमंडल को बर्खास्त करते हुए सत्ता के सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए। विलीनीकरण के लिए तीन महीने जमकर आंदोलन हुए।

- जब नवाब हमीदुल्ला हर तरह से हार गए तो उन्होंने अपनी हार स्वीकारते हुए 30 अप्रैल 1949 को विलीनीकरण के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए. जिसके बाद आखिरकार 1 जून 1949 को भोपाल रियासत भारत का हिस्सा बन गई।