8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

3 एबीसी के जिम्मे ‘1.20 लाख’ डॉग की नसबंदी, आदेश के बाद मचा हड़कंप

MP News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निकायों में हड़कंप मच गया। नगर निगम अब जमीन तलाशने और योजना ढूंढने में जुटा हैं।

2 min read
Google source verification
फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: नगर निगम का राजधानी को 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने का सपना महज स्वप्न ही है। निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए छह नए पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्र खोलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। पिछले चार साल में करीब 61580 हजार कुत्तों की नसबंदी पर 8 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद कुत्तों की आबादी 1.20 लाख के आंकड़े को पार कर गयी है।

सुप्रीम कोर्ट ने खूंखार आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया है। लेकिन भोपाल में ऐसी व्यवस्था नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निकायों में हड़कंप मच गया। नगर निगम अब जमीन तलाशने और योजना ढूंढने में जुटा हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल शेल्टर होम बनाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन फंड की वजह से योजना पर अमल नहीं हुआ।

कुत्तों की आबादी बेकाबू

निगम के पास फिलहाल तीन एबीसी केंद्र हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रतिदिन करीब 300 नसबंदी की है। लेकिन होती 40-50 की है। क्योंकि, डॉक्टर्स नहीं हैं। 1100 रुपए में नसबंदी कैसे? एडब्ल्यूबीआई प्रति कुत्ते पर नसबंदी के लिए अनुशंसित 1650 के मुकाबले निगम करीब 1100 खर्च करता है। इसमें 200 परिवहन के भी हैं। प्रभारी डॉ. पीपी सिंह ने कहा- कम बजट के कारण समस्याएं आ रही हैं।

3200 फीमेल डॉग

शहर में लगभग 32,000 फीमेल डॉग हैं, जिनमें से प्रत्येक साल में दो बार 8 से 10 पिल्लों को जन्म देती हैं। इसलिए एक साल में कुत्तों की आबादी दोगुनी हो जाती है। इसीलिए निगम में 15-20 शिकायतें रोज आती हैं।

केंद्र सरकार को अतिरिक्त एबीसी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार कमी आ रही है। निगम नसबंदी संबंधी कार्य को प्राथमिकता से कर रहा है।- टीना यादव, अपर आयुक्त,नगर निगम

तंत्र में सुधार की जरूरत

शहर में कुत्तों की बेकाबू आबादी, धीमी नसबंदी और बढ़ता खर्च यह साबित करता है कि भोपाल को 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने का सपना पूरा नहीं होगा। इसलिए मौजूदा तंत्र में सुधार की जरूरत है। शिका काकडे, पशु प्रेमी