16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाथियों के खरीदी और बिकी की खुली राह, MP में 50 पालूत हाथी

वन-पर्यावरण मंत्रालय की नई गाइड लाइन से अब हाथियों के खरीदी और बिक्री की राह आसान हो गई है। हाथियों का मालिकाना हक वन विभाग बदल सकेगा। सरकार ने इस व्यवस्था पर रोक लगा रखी थी, इसके चलते हाथियों को लेकर उसके मालिक, मठ, मंदिर के ट्रस्टी परेशान रहते थे। परिस्थितिज

2 min read
Google source verification
elephant.jpg

An Elephant fell into a well in Chittoor, rescued by officials, Video

भोपाल. जलवायु एवं वन-पर्यावरण मंत्रालय की नई गाइड लाइन से अब हाथियों के खरीदी और बिक्री की राह आसान हो गई है। हाथियों का मालिकाना हक वन विभाग बदल सकेगा। सरकार ने इस व्यवस्था पर रोक लगा रखी थी, इसके चलते हाथियों को लेकर उसके मालिक, मठ, मंदिर के ट्रस्टी परेशान रहते थे। परिस्थितिजन्य कारणों से हाथियों का पेट भरने और उन्हें कमाई का जरिया बनाने के लिए महावत के हवाले कर देते थे।
हाथी पालने के मानदंड में हुए बदलाव को लेकर वन विभाग हाथियों के मालिकों की तलाश कर रहा है। हालांकि प्रदेश में करीब 50 लोगों ने हाथी पालने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इन में से करीब 18 हाथियों के मालिकों का पता लगाया जा सका है। अगले माह तक इनकी पूरी जानकारी अपडेट की जाएगी। साथ ही हाथी मालिकों को नए मानदंड के अनुसार उनके रहवास विकास की व्यवस्थाएं विभाग को करानी होगी। जिसमें कि शहरी क्षेत्रों में हाथी मालिक को स्वीमिंग पुल और ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा उन्हें चारागाह तथा रोजाना भ्रमण के लिए भी पर्याप्त भूमि की व्यवस्था करानी होगी। डॉक्टरों से हर दो तीन माह में स्वास्थ्य परीक्षण भी करना होगा। उनके आवास की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा।


वर्तमान में ये है व्यवस्था
वर्तमान में हाथियों का रजिस्ट्रेशन वन विभाग में किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के लिए हाथी खरीदी के संबंध में दस्तावेज दिखाना पड़ता है। इसके आधार पर वन विभाग द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। इस प्रमाण पत्र के आधार पर महावत और मालिक हाथी को लेकर देश के किसी भी कोने में लेकर भ्रमण कर सकते हैं। हाथियों के लिए कोई आवास भी नहीं बनाए जाते हैं। चारे-पानी की व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। अब हाथी मालिकों को नए मानदंडों के अनुसार व्यवस्थाएं जुटानी होगी।

चिप में होगी हाथियों की कुंडली
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार हाथियों के कान में एक चिप लगाई जाएगी, जिसमें उनकी पूरी कुडली होगी। इसमें हाथियों की उम्र से लेकर उसके मालिक नाम तथा पता स्टोर होगा। इस चिप के जरिए उसके बारे में पूरी जानकारी ली जा सकेगी। वर्तमान में हाथियों के कान में एक बिल्ला लगा दिया जाता है, कई बार हाथी मरने के बाद लोग बिल्ले को दूसरे हाथी के कान में लगा देते थे, जिससे कि उन्हें रजिस्ट्रेशन न कराना पड़े। वैसे भी रजिस्ट्रेशन में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है।

हाथी पालने पर प्रतिबंध
वर्ष 2003 से हाथी पालने पर प्रतिबंध है। इसके चलते इस दौरान किसी को भी नए हाथी के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है। अब हाथी के पालने और खरीदने के लिए लाइसेंस भी दिए जा सकेंगे।

वर्तमान में हाथियों के ये स्थिति
जंगलों में पालतू हाथी-लोगों के पालतू हाथी
कान्हा नेशनल पार्क-18-01
पन्ना नेशनल पार्क-16-0
संजय नेशनल पार्क-4-0
सतपुड़ा नेशनल पार्क-6-0
पेंच नेशनल पार्क-5-0
बांधवगढ़ नेशनल पार्क-14-0
इंदौर डिवीजन -0-1
रतलाम डिवीजन -0-2
सिवनी सर्कल -0-1
छतरपुर सर्कल -0-13

वर्तमान में प्रदेश में 50 जंगली हाथी भ्रमण कर रहे हैं।