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कलियासौत पर लगेगा 5वा ई-सर्विलियंस कैमरा टावर, बाघों पर रहेगी नजर

भोपाल. शहरी सीमा में लगातार बाघ मूवमेंट हो रहा है और वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियां बढ़ रही है। अभी बाघ, तेंदुए कब, कहां और किस रास्ते से शहर की ओर आ रहे हैं इसकी जानकारी वन विभाग को नहीं लग पा रही है। मैनिट में हुए बाघ विचरण के बाद कालियासौत या वाल्मी की पहाड़ी पर 5वा ई-सर्विलियंस कैमरा टावर लगाने की मांग उठी थी। इस टावर की जरूरत शहर की तरफ बार-बार आ रहे बाघ व तेंदुए की निगरानी करने के लिए पड़ रही है।

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प्रदेश की सबसे बड़ी एनएलआइयू लाइब्रेरी होगी डिजिटलाइज

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अधिकारियों के मुताबिक कैरवा वन क्षेत्र में अभी 5 बाघों का डेरा है। ये बाघिन टी123 और उसके 4 बच्चे हैं। इन्हीं बाघों का विचरण शहरी सीमा में है। अगर कैमरा टावर लगते हैं तो इनके मूवमेंट्स ट्रेक हो सकेंगे। वन क्षेत्र की सीमा के आस-पास भी आते ही इनका अलर्ट सीधे वन विभाग के पास पहुंच जाएगा। इनकी 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग के साथ तस्वीरें और वीडियो टावर कैद कर लेगा।

अवैध निर्माण पर नजर रहेगी

ये कैमरे जंगलों में लगी आग, अवैध निर्माण से लेकर हर गतिविधी का अलर्ट भेजते हैं। इससे मोबाइल पर ही दूर बैठे वन विभाग के अधिकारी पूरी नजर रख पाएंगे। यह पूरा सिस्टम स्वत: काम करता है।हालांकि अधिकारियों के मुताबिक राजनितिक और बड़े बिजनेसमैन के दबाव की वजह से ये टावर नहीं लग पा रहा है।

पूरे भारत में सिर्फ तीन जगह है ये सिस्टम

भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण प्रोजेक्ट के तहत पूरे देश में अभी तीन जगह ई-सर्विलियांस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इनमें से एक भोपाल है। 2014 में भोपाल की कैरवा चौकी से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में अभी चार जगह ई-सर्विलियांस टावर लगे हैं। इन सभी का इनपुट कैरवा चौकी में लगे कंट्रोल टावर पर मॉनिटर होता है। इन चारों से लगभग 40 बाघों की लाइव मॉनिटरिंग हो रही है।

भोपाल में 4 जगह में लगे हैं टावर

मीरीया कोट वन क्षेत्र

मालाडूंगरी वन क्षेत्र

कालीखो वन क्षेत्र

झिरी वन क्षेत्र

कैसे काम करते हैं ये टावर

इन टावर की रेंज में होने वाली हर गतिविधि को थर्मल और क्लियर व्यू में देख सकते हैं। इसमें जूम-इन, जूम आउट से लेकर चारों दिशाओं में इसे घुमाकर देख सकते हैं। इसकी रिकॉर्डिंग 24 घंटे होती रहती है तो बाद में भी देखने की सुविधा है। अगर किसी भी तरह के कोई अलर्ट होते हैं तो इससे कंट्रोल रूम में लगे सिस्टम में हाई अलर्ट शो हो जाता है। इसके बाद संबंधित वन क्षेेत्र के अधिकारियों को तुरंत अलर्ट मैसेज भेज कर कारवाई की जाती है। वन क्षेत्रों लगे ये टावर स्वत: ही सोलर पैनल से चार्ज होते हैं। इनका डेटा कैरवा चौकी में लगे टावर में रिकॉर्ड हो रहा है।

हाल ही में झिरी क्षेत्र के एक बाघ को पैर में चोट लगी थी। इसकी जानकारी कंट्रोल रूम की टीम ने संबंधित वन अधिकारियों को अलर्ट मैसेज के जरिए दी। बाघ के पूरे मूवमेंट को ट्रेक कर अधिकारी उस पहुंचे और पैर में लगी चोट को ठीक किया। ऐसे ही रात में जंगल में भटकते लोगों की जानकारी भी दी।

वर्जन

कैरवा क्षेत्र में ई-सर्विलियांस टावर लगाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। नए साल के अप्रेल के बजट में इस प्रोजेक्ट फंडिंग के लिए प्रस्ताव रखेंगे।

- आलोक पाठक, डीएफओ, भोपाल