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60 हजार करोड़ का प्लान, निजी हाथों में होगी हीरे की खदान

प्रदेश सरकार छतरपुर की बंदर हीरा खदान को अब निजी हाथों में सौंपने जा रही है।

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भोपाल। प्रदेश सरकार छतरपुर की बंदर हीरा खदान को अब निजी हाथों में सौंपने जा रही है। इसमें से करीब 60 हजार करोड़ रुपए की कीमत के हीरे निकालने की योजना है। अभी खदान की 364 हेक्टयर भूमि पर हीरा उत्खनन होगा। आस्ट्रेलियाई कंपनी रियो टिंटो ने इसी क्षेत्र के लिए प्रॉस्पेक्टिव प्लान बनाया था। बाद में अन्य 490 हेक्टेयर में उत्खनन के लिए नए सिरे से प्रॉस्पेक्टिव प्लान तैयार किया जाएगा। खनिज विभाग नीलामी प्रक्रिया तैयार कर रहा है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार समिति नीलामी की शर्तों और उसकी प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लेगी।

समय पर काम नहीं तो होगी ब्लैक-लिस्टेड
सूत्रों के अनुसार छतरपुर के बंदर क्षेत्र में हीरा उत्खनन के लिए निजी कंपनियों को तीन साल का समय दिया जाएगा। इस दौरान माइनिंग प्लान से लेकर वन एवं पर्यावरण की स्वीकृति सहित सारे क्लियरेंस लेने पड़ेंगे। यह भी निर्धारित होगा कि कंपनी कितनी मात्रा में हीरे की नीलामी देश या विदेश में करेगी। हीरे के विक्रय मूल्य पर रायल्टी वसूलने का प्रावधान किया गया है। निर्धारित समय पर काम नहीं करने पर कंपनी को ब्लैक-लिस्टेड किया जाएगा।

एनएमडीसी को दी गई थी खदान
पिछली बार प्रदेश सरकार ने एनएमडीसी लिमिटेड को छतरपुर में 958 हेक्टेयर क्षेत्र में हीरे की संभावनाओं पर काम करने की जिम्मेदारी दी थी।एनएमडीसी ने प्रॉस्पेक्टिव प्लान तैयार करने के लिए 2004 में इसे रियो टिंटो को सौंप दिया। रियो टिंटो ने हीरे की खोज तथा अन्य कार्यों पर करीब 55 करोड़ डालर का निवेश किया। कंपनी ने 2016 में काम छोड़ दिया और बकस्वाहा स्थित 100 कमरे का एसी होटल, 25 एकड़ जमीन, वाहन तथा अन्य संपत्तियां सरकार को दान कर दीं।

खनिज विभाग का दावा है कि कंपनी ने 17 करोड़ रुपए के प्रोसेसिंग प्लांट के साथ करीब चार करोड़ रुपए की ज्वैलरी भी छतरपुर कलेक्टर को सौंप दी। खनिज साधन विभाग के डायरेक्टर विनीत आस्टीन ने बताया, छतरपुर में हीरा उत्खनन के संबंध में कुछ विशेष शर्तें रखी जा रही हैं। हीरे के मूल्यांकन और नीलामी शर्तों में संशोधन होना है। इन पर हाईपावर कमेटी के समक्ष अंतिम निर्णय लिया जाएगा।