
भोपाल. सरकार ने आउटर रिंग रोड के लिए 3000 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। ये अच्छी बात है, लेकिन भोपालवासियों को ज्यादा फायदा इनर रिंग रोड से होगा। मिसरोद से कोलार, नीलबड़, बैरागढ़, करोंद, भेल, कटारा तक अलग-अलग सड़कों को चिन्हित कर जोड़ा जा सकता है। ये रिंग रोड करीब 60 किमी की होगी। इसका शहर की सीमा से लगी 350 से अधिक कॉलोनियों के करीब चार लाख लोगों को लाभ होगा। ये पब्लिक ट्रांसपोर्ट की पहुंच के साथ ही अन्य क्षेत्रों से आसानी से जुड़ जाएंगे।
जाम से मिलेगी मुक्ति
इनर रिंग रोड पर ट्रैफिक बढ़ेगा तो अंदरूनी मुख्यमार्ग से ट्रैफिक जाम की दिक्कत भी घटेगी। अभी लोग शहर के एमपी नगर से लेकर चूनाभट्टी, शाहपुरा, माता मंदिर, वीआइपी रोड से आवाजाही को मजबूर हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों की नौ सड़कों को जोड़कर इनर रिंग रोड बन सकती। इसमें बड़ा तालाब पर एक एलीवेटेड रोड बनानी होगी।
इन सड़कों को जोड़कर बनाई जा सकती है इनर रिंग रोड
- कोलार के डी माटज़् के पास नहर किनारे चार लेन रोड सलैया तक बनाई जा रही है। यही रोड नहर किनारे केरवा की ओर और यहां से सीपीए नगर वन के पास होते हुए नीलबड़- सूरज नगर से जुड़ रही है। सूरज नगर से आगे सेवनियां गोंड और तालाब का हिस्सा है। यहां से यदि वीआइपी रोड की तजज़् पर एक ब्रिज बने तो रोड सीधे बैरागढ़- लालघाटी से जुड़ सकती है। यहां से जेल रोड और करोंद- भानपुर का रास्ता है। करोंद से भेल- बरखेड़ा पठानी और कटारा होते हुए बीडीए की प्रस्तावित 45 मीटर रोड से होते हुए जाटखेड़ी मिसरोद तक रोड बन जाएगी। इससे बीसीएलएल की बसों को भी कॉलोनियों से कनेक्ट कर 300 कॉलोनियों के चार लाख लोगों को राहत मिल सकती है।
नौ टुकड़ों को जोड़कर 60 किमी लंबी इनर रिंग रोड से पूरा शहर जुड़ेगा
- 8.82 किमी बैरागढ़ से नीलबड़ तक
- 9.82 किमी नीलबड़ से कोलार के गेहूंखेड़ा- सनखेड़ी रोड तक
- 3.35 किमी सनखेड़ी से मिसरोद तक
- 7.03 किमी मिसरोद से कटारा हिल्स
- 4.02 किमी कटारा हिल्स से बरखेडा पठानी
- 17.01 किमी बरखेड़ा पठानी से करोंद
- 10.08 किमी करोंद से बैरागढ़ तक
- 60.03 किमी कुल लंबाई की रोड इनर रिंग रोड से पूरा शहर जुड़ सकता है।
(बैरागढ़ से तालाब किनारे खजूरी सड़क होते हुए नीलबड़ की दूरी अभी 23 किमी है। लेकिन यदि तालाब पर एलीवेटेड रोड बनाएं तो दूरी महज आठ किमी में सिमट जाएगी।)
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अभी इस तरह की बाधाएं
इनर रिंग रोड बनाने के लिए शहर की बड़ी रोड को जोडऩे के लिए कई स्थानों पर ओवरब्रिज बनाना पड़ेगे। तालाब के ऊपर भी एक एलीवेटेड रोड बनाना होगा। इसके साथ रिंग रोड के लिए कम से कम सड़क की चौंडा़ई फोर लेन के हिसाब से 30 मीटर होना चाहिए। लेकिन शहर के अंदर की कई सड़कें 16 मीटर चौंड़ी ही हैं। कई जगह अतिक्रमण के कारण भी सड़कें संकरी हो गई हैं। कुछ सड़कों के रास्ते झुग्गियों ने रोक रखे हैं तो किसी के रास्ते में हाइटेंशन लाइन आ रही है। कुछ सड़कों के रास्ते में वन क्षेत्र भी आएगा। इनके निमाज़्ण के लिए अलग से बजट की जरूरत होगी। लेकिन यह ऐसी चीजें हैं जिन्हें अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल बनाकर आसानी से हल किया जा सकता है। क्योंकि यह लाखों लोगों की सुविधा से जुड़ा मामला है।
पब्लिक कनेक्ट
कोलार वाले को बैरागढ़ जाना है तो उसे न्यू माकेज़्ट होते हुए ही गुजरना होगा। इस तरह शहर का पूरा ट्रैफिक पार करना होगा। इनर रिंग रोड बने तो लाभ मिल जाएगा।
डॉ. धीरज शुक्ला, निवासी कोलार
Published on:
02 Sept 2023 12:48 am
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