
राजस्थान डिस्कॉम में बिजली के दाम बढ़ाने के प्रस्ताव पर अब होगी जनसुनवाई
भोपाल। पिछली शिवराज सरकार में 71 लाख परिवारों को अपात्र होने के बावजूद संबल योजना के तहत बिजली में 6816 करोड़ बांट दिए गए। यह राशि सब्सिडी के तौर इन्हें सस्ती बिजली देने के ऐवज में सरकार ने चुकाना तय किया था। लेकिन, अब इन परिवारों के अपात्र होने का खुलासा हुआ है। इसमें पिछली भाजपा सरकार के समय भाजपा पार्टी के पन्ना-प्रभारी से लेकर अन्य लोग शामिल हैं, जिनमें आयकर दाता तक शामिल है।
इस कारण सरकार ने इनसे अब पैसे की रिकवरी का फैसला किया है। इन्हें अब रिकवरी के नोटिस जारी होंगे। यदि अपात्र लोग रिकवरी के तहत पैसे नहीं देते हैं, तो उन पर पुलिस कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इस योजना का लाभ लेने के लिए शपथ-पत्र दिया गया था। झूठा शपथ-पत्र देने की स्थिति में आपराधिक प्रकरण बनता है। इस कारण शपथ-पत्र को आधार बनाकर अब अपात्रों से रिकवरी होगी। जल्द ही इस मामले को कैबिनेट में लाया जाएगा।
पूरा मामला संबल के तहत श्रमिकों के पंजीयन का है। पिछली शिवराज सरकार में विधानसभा चुनाव के पूर्व ताबड़तोड़ तरीके से पंजीयन किया गया। इसके बाद सस्ती बिजली के तहत इन संबल के तहत रजिस्टर्ड परिवारों को सब्सिडी दे दी गई। इसमें श्रम विभाग ने अपने रजिस्टर्ड श्रमिकों की सूची बिजली विभाग को दी, जिसके बाद बिजली विभाग ने बिजली कंपनियों के माध्यम से सस्ती बिजली देकर बिजली बिल की राशि को सीधे कंपनियों को दे दिया।
इसमें औसत 568 करोड़ रुपए महीना और सालभर में करीब 6816 करोड़ रुपया चुकाया गया। योजना को सालभर से ज्यादा का समय हो गया है। अब इसकी जांच की गई, तो 71 लाख अपात्र पाए हैं। इन अपात्र लोगों की सूचियां श्रम विभाग ने बिजली विभाग को दे दी है। जिसके बाद बिजली महकमे ने नोटिस देने की तैयारी कर ली है।
ऐसा है सब्सिडी का गणित-
सस्ती बिजली के लिए इस योजना में उपभोक्ताओं ने 200 रुपए चुकाए, जबकि इनका औसत बिल एक हजार रुपए महीना था। इस कारण सरकार ने 800 रुपए हितग्राही के हिसाब से हर महीने का बिल सीधे बिजली कंपनियों को दे दिया। इस कारण हितग्राहियों को एक हजार रुपए बिल के बदले में केवल 200 रुपए देना पड़े। अब अपात्र साबित होने के कारण इन्हें 800 रुपए की सब्सिडी वाली पूरी राशि लौटाना होगी।
35 हजार मिले आयकर दाता-
श्रम विभाग को सत्यापन में 35 हजार से ज्यादा तो आयकर दाता ही मिले हैं, जबकि योजना का लाभ लेने के लिए आयकर दाता नहीं होने की शर्त थी। इसके अलावा फर्जी नाम भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा संख्या इंदौर परिक्षेत्र की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के हितग्राहियों की है।
फैक्ट फाइल-
- 2.18 करोड़ श्रमिक का पंजीयन संबल में हुआ
- 71 लाख श्रमिक परिवार फर्जी पाए गए
- 35 हजार से ज्यादा आयकर दाता पाए गए
- 326 करोड़ की सब्सिडी अभी तक दी जा चुकी
- 999 करोड़ की सब्सिडी बिजली की आकी अभी तक
मंत्री बोले- 58 लाख फर्जी हितग्राही भाजपा से जुड़े लोग...
संबल योजना की जांच में दो करोड़ 70 लाख फर्जी हितग्राही पाए गए हैं। शिवराज सिंह की सरकार में भाजपा के पन्ना प्रभारियों तक को इस फर्जीवाड़े में शामिल किया। जांच के बाद 56 लाख वे लोग हैं, जो भाजपा से जुड़े हैं, उन पर क्या कार्रवाई की जाए, यह तय जल्द ही केबिनेट की बैठक में होगा। इसमें जो भी अपात्र या फर्जी भुगतान हुआ है, उसकी वसूली भी की जाएगी। - महेंद्र सिंह सिसौदिया, मंत्री, श्रम विभाग मप्र
Updated on:
11 Nov 2019 10:57 am
Published on:
11 Nov 2019 08:40 am
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