
भोपाल। 7वां वेतनमान लागू होने के बाद कर्मचारियों को अब वृत्तिकर यानि प्रोफेशनल टैक्स की चिंता सताने लगी है। नए वेतनमान(7th Pay Commission big news in hindi latest Update12 nov2017) के बाद कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ गई है, और न्यूनतम वेतन भी 18 हजार रुपए है, जबकि 1 लाख 80 हजार तक की वार्षिक आय से ऊपर वाले कर्मचारियों को वृत्तिकर देना पड़ेगा। एेसे में कर्मचारियों ने वृत्तिकर को समाप्त करने अथवा इसकी दरें संशोधित करने की मांग की है।
प्रदेश में वृत्तिकर अधिनियम 1995 से लागू है। कर्मचारी पहले से ही इस कर का विरोध कर रहे थे। छठवें वेतन में वेतनमान बढऩे के कारण 2013 में वृत्तिकर अधिनियम में संशोधन किया गया था और तय किया था कि 1 लाख 80 हजार से अधिक वार्षिक आय (7th Pay Commission big news in hindi)वाले कर्मचारियों को ही 2500 वार्षिक वृत्तिकर देना होगा। वर्तमान में भी यही व्यवस्था लागू है।
अब सातवां वेतनमान लागू हो गया है और कई विभागों में यह मिलने भी लगा है। सातवें वेतनमान में कर्मचारियों की न्यूनतम आय 1 लाख 80 हजार से अधिक हो गई है, इसलिए अब किसी भी कर्मचारी को वृत्तिकर में छूट का लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए कर्मचारी संगठन इसका विरोध कर(7th Pay Commission big news in hindi latest 12 nov2017) इसे समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
आईएएस और चपरासी का एक जैसा वृत्तिकर :
देश में प्रदेश एेसा राज्य है, जहां एक आईएएस अधिकारी और चपरासी दोनों ही एक जैसा वार्षिक वृत्तिकर देते हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार वृत्तिकर के रूप में जिसकी राशि 1 लाख 80 हजार रुपए से अधिक है, उसे 2400 रुपए वार्षिक वृत्तिकर देना पड़ता है। यह व्यवस्था 1 लाख 80 हजार रुपए के बाद अधिकतम आय सीमा पर निर्भर करता है।
हम शासन को जल्द भेजेंगे चिट्ठी :
मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा ने कहा कि हम इसका विरोध करते हुए शासन को चिट्ठी लिखकर इस कर को समाप्त करने की मांग करेंगे। यह छोटे कर्मचारियों के साथ अन्याय है। पूर्व में भी शासन ने इसे लागू किया था, उस समय कर्मचारियों ने जाजिया कर कहकर इसका विरोध किया था।
2013 में वृत्तिकर की दरों में संशोधन कर इसे 1 लाख 80 हजार रुपए तक वार्षिक आय वाले कर्मचारियों को छूट दी थी, अब सातवां वेतन (7th Pay Commission big news latest 12 nov2017)लागू होने के बाद अधिकांश कर्मचारियों की न्यूनतम आय इससे ज्यादा हो गई है। इसलिए इसमें संशोधन किया जाना चाहिए, अथवा इसे समाप्त करना चाहिए।
Published on:
12 Nov 2017 01:00 pm
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