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क्रिप्टो के मायाजाल में फंसने वाले 80 प्रतिशत डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी

- चंद घंटों में चार गुना कमाने के लालच में लुटा रहे जमा पूंजी - चाइना और दुबई जैसे शहरों से संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय गैंग - पत्रिका टीम ने प्रदेश के एक दर्जन केसों की पड़ताल की जिसमें फ्रॉड का शिकार हुए सभी ग्रेजुएट

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क्रिप्टो करेंसी की ऑनलाइन ट्रेडिंग कर कुछ ही समय में चार गुना पैसा करने के नाम पर ठगी एकाएक बढ़ गई है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस मायाजाल में कम- पढ़े लिखे नहीं बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और सरकारी अधिकारी फंस रहे हैं। पत्रिका की टीम ने जब प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा केसों की पड़ताल की तो उसमें ये तथ्य निकलकर सामने आया कि सभी केसों में ठगी का शिकार होने वाले लोग ग्रेजुएट या उससे ज्यादा पढ़े लिखे थे। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या पैसा कमाने का लालच इस कदर बढ़ गया है कि हम सही और गलत का फैसला कर पाने में असमर्थ हो चुके हैं।
चाइना और दुबई से संचालित हो रही गैंग

दरअसल एक्सपर्ट ने बताया कि ये एक अंतराराष्ट्रीय नेटवर्क है जो भारत में भी संचालित हो रहा है। लेकिन इसके सरगना चाइना और दुबई जैसे शहरों में बैठे हुए हैं। कई मामलों में विदेशी व्यक्तियों की शिनाख्त भी हुई। जिनके आईपी एड्रेस का प्रयोग ठगी के लिए हो रहा है। सबसे ज्यादा टेलीग्राम ग्रुप का इस्तेमाल इसके लिए किया जा रहा है। कभी- कभी तो पैसा लगवाने के बाद रातोरात टेलीग्राम ग्रुप बदल दिया जाता है।

ऐसे काम करता है गिरोह

एप या पोर्टल पर खाता बनवाकर पहले छोटी रकम डेढ़ से दो हजार के निवेश पर रिटर्न देते हैं। जो वालेट से उनके खाते में ट्रांसफर हो जाती है। इसके बाद लाखों में रूपये निवेश कराए जाते हैं। पैसा वॉलेट में आ जाता है। लेकिन उसे लॉक कर लगातार पैसे मांगे जाते हैं। साइबर सेल के पास ऐसे सैकड़ों मामले आ चुके हैं। जिसमें करोड़ों रूपए फंसे हुए हैं।

महीनों पहले लूटे अब तक नहीं मिला पैसा

क्रिप्टो में मोटा मुनाफा कमाने के लालच में करीब डेढ़ लाख रूपए गवां चुके एक इंजीनियर ने बताया कि सायबर पुलिस के पास मामला है। फ्रॉड करने वाले व्यक्ति की लोकेशन आंध्रप्रदेश की आई है। लेकिन पुलिस इस इंतजार में है कि कुछ केस और जाए तब इकट्ठा जाए। केवल एक केस लेकर नहीं जा सकती है।

ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े कुछ तथ्य

- देश में ऑनलाइ ठगी के मामलों में तीन गुना वृद्धि

- सबसे ज्यादा साइबर ठगी वाले राज्यों में यूपी, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, मप्र और हरियाणा।

- हर महीने देशभर में करीब 15 हजार 320 मामले दर्ज हो रहे है।

- एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 80 से 90 प्रतिशत शिक्षित लोग साइबर ठगी का शिकार।

मप्र में साल दर साल ऐसे बड़ा साइबर अपराध का ग्राफ
2018- 2834
2019- 4058
2020- 4735
2021- 6592
2022- 8976
2023- 11500+

डिजिटल हाइजीन ही उपाय
साइबर क्राइम से सुरक्षित रहने का एक ही उपाय है कि डिजिटल हाइजीन को अपनाया जाए। साथ की किसी भी लालच में आने से बचें। क्यों कोई आपको चार गुना मुनाफा देगा इस बात पर भी एक बार सोचना चाहिए। जब तक आप सामने वाले को जानते नहीं हैं तब तक भरोसा नहीं करें।
योगेश देशमुख, एडीजी, राज्य साइबर क्राइम