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पादर्शिता पर सवाल: इस निगम में हैं 800 आरटीआई आवेदन पेंडिंग!

छुपाकर काम करने में माहिर नगर निगम की पड़ताल करने पर चौंकाने वाली हकीकत सामने आई।

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Nagar nigam bhopal

भोपाल। राज्य सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी की आरटीआई नहीं देने के मामले में नगर निगम को फटकार के बाद पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। निगम में अभी आरटीआई के 800 आवेदन पेंडिंग हैं।

गौरतलब है कि राज्य सूचना आयुक्त ने नगर निगम द्वारा जानकारियों को छुपाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसके लिए छह पेज का निर्देश जारी कर धारा चार के तहत सारी जानकारियां ऑनलाइन करने का भी कहा था। बैठना पड़ा महापौर निवास पर: स्वच्छता अभियान के तहत मॉड्यूलर टॉयलेट खरीदी को लेकर नगर निगम द्वारा सूचना के अधिकार में जानकारी नहीं देने पर एक्टिविस्ट मनोज त्रिपाठी को अद्र्धनग्न होकर महापौर निवास के बाहर बैठना पड़ा था। निगम की काफी किरकिरी हुई थी।

ये हैं धारा चार-
एक्टिविस्ट नितिन सक्सेना का कहना है कि आरटीआई अधिनियम की धारा ४ विभाग को खुद ही अपनी जानकारियां सार्वजनिक करने की बात कहती है। प्रोजेक्ट से लेकर लेन-देन और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारियों के साथ रोजाना के जारी आदेश-निर्देश की अपडेट स्थिति वेबसाइट पर अपलोड करने का नियम है। यदि एेसा हो तो आमजन आसानी से निगम की हर गतिविधि को देख सकता है, उसे आरटीआई की जरूरत ही न पड़े।

इन बड़े मामला में छिपाई जानकारी-
बीआरटीएस : बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की डीपीआर पता करने तत्कालीन महापौर सुनील सूद तक परेशान हो गए थे। 450 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की तीन डीपीआर बनीं, लेकिन ये अफसरों के पास ही रहीं। एेसे में आमजन की भागीदारी नहीं हो सकी और अंतत: प्रोजेक्ट बुरी तरह फेल हो गया।

सड़क निर्माण: सड़क निर्माण की जानकारी का मामला डेढ़ साल से राज्य आयोग में है। इस दौरान चार सिटी इंजीनियर बदल गए। अब इस मामले में करीब डेढ़ सौ फाइलों के गुमने की बात सामने आ रही है।

म्यूजिकल फाउंटेन: बड़े तालाब किनारे म्यूजिकल फाउंटेन के नाम पर बनाए जा रहे सिनेमाघर की जानकारी छिपाई गई। इसमें करीब १२ आरटीआई लगीं, लेकिन एक की जानकारी भी नहीं दी। तत्कालीन निगमायुक्त छवि भारद्वाज को आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने धारा चार में जानकारी जाहिर करने का कहा, उन्होंने इसे स्वीकारा भी, लेकिन बाद में मुकर गईं।

नर्मदा प्रोजेक्ट: नर्मदा प्रोजेक्ट के तहत लाइन बिछाने का काम हुआ। 450 करोड़ रुपए के इस काम में डीपीआर से लेकर कंसल्टेंट और अन्य मामलों की जानकारी छिपाई गई। 80 से अधिक आरटीआई लगीं और एक का भी पूरा जवाब नहीं दिया गया। कुछ आज भी राज्य सूचना आयोग में लगी हैं।

बड़े तालाब रिटेनिंग वॉल:
बड़े तालाब में खानूगांव की और रिटेनिंग वॉल का काम छह करोड़ रुपए में किया गया। इसकी डीपीआर से लेकर मंजूरी और तमाम जानकारियां निकलवाने 40 आरटीआई लगी हुई हैं। एक का भी जवाब नहीं दिया गया। पूरा मामला बेहद गुपचुप किया गया। अंतत: मामला एनजीटी पहुंचा, काफी विरोध हुआ और मुख्यमंत्री को खुद इसे रद्द करना पड़ा। बावजूद इसके इस दीवार को गिराया नहीं गया और जिम्मेदारों से वसूली नहीं हो पाई।