
१७२ एकड़ जमीन आवंटित कर दी गई, लेकिन ११ साल बाद भी इसकी नींव तक नहीं रखी जा सकी।
भोपाल. भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल गांव (सतगढ़ी स्पोट्र्स विलेज) के लिए 2008 में 172 एकड़ जमीन आवंटित कर दी गई, लेकिन 11 साल बाद भी इसकी नींव तक नहीं रखी जा सकी। जब अनुबंध किया गया था, उस दौरान प्रोजेक्ट की लागत करीब 900 करोड़ आंकी गई थी। अनुबंध के अनुसार 2012 में प्रोजेक्ट पूरा होना था ,लेकिन इसकी ईंट भी नहीं रखी जा सकी। इसके चलते खेल विभाग ने एस्सल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मुंबई की 20 करोड़ रुपए बैंक गारंटी जब्त कर ली।
इसके बाद से ही यह प्रोजेक्ट कानूनी मामलों में उलझा हुआ है। निचली अदालत और हाईकोर्ट से विभाग ने मुकदमा जीत लिया, लेकिन समय पर सुप्रीम कोर्ट में कैवियट नहीं लगाने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एस्सल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मुंबई ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी। जबकि खेल विभाग को सक्रियता दिखाते हुए कैविएट लगाकर रखना चाहिए था, ताकि मामले में पहले शासन की सुनवाई हो सके।
खेल की जगह खेती, होने लगे कब्जे
हाल ही में मौजूदा सरकार ने बरखेड़ा नाथू में क्रिकेट स्टेडियम की जगह का निरीक्षण किया तो सतगढ़ी खेल गांव को लेकर भी उम्मीद जागी। लेकिन इसकी राह में अब भी कई रोड़े है। राज्य सरकार ने 2008 में इसके लिए सतगढ़ी गांव में 172 एकड़ जमीन खेल विभाग को आवंटित कर दी है। लेकिन इसकी देखरेख नहीं होने के कारण मौके पर अवैध कब्जे होने लगे हैं। कई जगह लोगों ने खेती करना शुरु कर दिया तो कई जगह झुग्गियों ने आकार ले लिया है। अब सतगढ़ी प्रोजेक्ट खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अफसरों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।
जहां यह प्रोजेक्ट 11 साल पिछड़ गया हैं, वहीं इसकी प्रोजेक्ट लागत भी कई गुना बढ़ गई है। 172 एकड़ में से करीब 50 एकड़ जमीन पर विकास और निर्माण कार्य के लिए एस्सल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मुंबई के साथ अनुबंध किया गया था। कंपनी को 3 साल में यहां निर्माण कार्य पूरा करना था, लेकिन मौके पर काम नहीं हो पाया। इसके चलते तब से ही यह प्रोजेक्ट कानूनी दांव-पेंच में उलझा हुआ है।
जीत के बाद भी कैविएट नहीं दायर की
खेल विभाग ने लाखों रुपए इस प्रोजेक्ट की कानूनी लड़ाई पर खर्च कर दिया। लेकिन हल नहीं निकला। निचली अदालत और हाई कोर्ट से खेल विभाग मुकदमा जीत भी गया, लेकिन अफसरों की ढीलपोल के कारण कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में एसलएलपी दायर कर मामले को फिर उलझा रखा है।
सतगढ़ी प्रोजेक्ट में हम 11 साल पिछड़ गए। अनुबंधित कंपनी इसे कानूनी दांव पेंच में उलझा कर रखना चाहती है। उसका कहना है कि हमने उनकी बैंक गारंटी गलत जब्त की है। निचली अदालत और हाईकोर्ट का फैसला शासन के पक्ष में आया, लेकिन अब वह सुप्रीम कोर्ट चला गया।
- बीएस यादव, संयुक्त संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग
Published on:
12 Feb 2019 09:10 am
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