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One Act Play : खुद को बताया ऑस्ट्रेलिया से आया मामा, सगों को लूटने की थी तैयारी

मायाराम सुरजन भवन में दो एकांकी का मंचन

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A Distant Relative and Refund staged at mayaram surjan bhawan bhopal

One Act Play : खुद को बताया ऑस्ट्रेलिया से आया मामा, सगों को लूटने की थी तैयारी

भोपाल. समांतर सोशियो कल्चरल सोसायटी की कक्षाभ्यस प्रस्तुति में रविवार को दो विश्व प्रसिद्ध एकांकी का मंचन किया गया। इसमें विलियम जैकब के ए डिस्टेंट रिलेटिव और फ्रित्ज कारिन्थी के द रिफंड का मंचन हुआ। मायाराम सुरजन भवन में मंचित इन एकांकी का निर्देशन चैतन्य सोनी और अभिषेक राजपूत ने किया। दोनों एकांकियों का हिंदी अनुवाद सेवक नैयर ने किया है। निर्देशक चैतन्य सोनी ने बताया कि इंसान का लोभ उससे कुछ भी करवा सकता है। लोभी व्यक्ति किसी भी हद तक गिर सकता है यहां तक कि वो रिश्तों की अहमियत तक को भूल जाता है। लालच के मद में धुत वह अपने सगों को लूटने से, उनका घर बर्बाद करने से भी नहीं चूकता। यह पूर्ण रूप से स्वार्थी होने के लक्षण हैं और ऐसे व्यक्ति का पतन तय है। इस एकांकी में ऐसे ही लोभी और स्वार्थी व्यक्ति की मानसिक अवस्था को हास्य रंग के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है।

ए डिस्टेंट रिलेटिव
ए डिस्टेंट रिलेटिव एक हास्य एकांकी है, जिसका मुख्य पात्र पिंटू एक तिकड़मबाज और नाकारा व्यक्ति है जो अभी-अभी जेल से पैरोल पर छूटकर अपनी बहन के घर आ धमकता है। वो भी उस वक्त जबकि उनकी बेटी की शादी एक थोड़े बहुत अमीर नौजवान के साथ ब्याहने की तैयारी में हैं। श्रीमान नहीं चाहते कि पिंटू वहां एक पल भी टिके, लेकिन वो दूसरी मिट्टी का बना है। वहां से जाना तो दूर, वो भांजी और उसके होने वाले मंगेतर को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाता है। अपने आपको ऑस्ट्रेलिया से आया अमीर मामा बताता है और उनकी जमा पूंजी हथियाने की पूरी तैयारी कर लेता है। ऐन मौके पर श्रीमान उसे पुलिस को पकड़वाने की धमकी देकर भगाने में कामयाब हो जाते हैं।

रिफंड
रिफंड एकांकी एक हल्का-फुल्का हास्यप्रद है। वहीं यह किसी भी देश की शिक्षा प्रणाली पर एक करारा व्यंग्य है। मुख्य पात्र वासरकौफ 18 सालों तक ढंग की कोई नौकरी नहीं मिलने से महसूस करता है कि उसकी स्कूल शिक्षा से उसे ऐसा कुछ भी हासिल नहीं हुआ है जो उसे जिंदगी में कहीं ले जा सके। लिहाजा शुरू से आखिरी तक वह स्कूल को दी गई पूरी फीस वापस पाने की कोशिश करता है। स्कूल में वासरकौफ का फिर से इम्तेहान लिया जाता है। वो प्रिंसिपल और टीचर्स को अत्यंत अटपटे और ओच्छे व्यवहार से भड़काता है, उन्हें बेशर्मी की हद तक अपमानित करता है। आसान से आसान सवालों का जवाब भी ऊल-जलूल तरीके से देता है। वो भी उल्टा सीधा। वो फेल होने की हर मुमकिन कोशिश करता है ताकि वापस मिल सके। लेकिन टीचर्स उसके हर अपमान का सहर्ष स्वागत करते हैं, बल्कि उसके हर गलत जवाब को किसी न किसी तरीके से सही साबित कर देते हैं ताकि वो फेल न हो पाए और थोथली व बेमानी शिक्षा की झूठी साख बनी रहे।