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‘सपाक्स समाज’ बिगाड़ सकता है पार्टियों के सियासी समीकरण.. देखें पूरा मामला!

रिटायर्ड अफसर उतरे मैदान में

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भोपाल। चुनावी साल में सत्ताधारी दल भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सपाक्स समाज के नाम से खड़ी हुई एक नई संस्था सिरदर्द साबित हो सकती है। सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण समाज नाम की यह संस्था आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग करते हुए मैदान में उतरी है।

संस्था प्रदेश में इन वर्गों के मतदाताओं को इस बात पर राजी कर रही है कि वो उसी उम्मीदवार को अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोट दें, जो प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करता हो और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू कराने के लिए काम करे। संस्था फिलहाल गैरराजनीतिक रूप से अभियान चला रही है, लेकिन चुनाव के वक्त संभावना है कि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतार सकती है।

सपाक्स समाज की बागडोर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने संभाल रखी है। अभी तक वे मंदसौर, नीमच, रतलाम जिले में बैठकें कर चुके हैं। जल्द ही पूरे प्रदेश में सपाक्स समाज नेटवर्क खड़ा कर लेगा। त्रिवेदी के साथ सपाक्स समाज संस्था में रिटायर्ड डायरेक्टर हेल्थ के.एल. साहू, रिटायर्ड इंजीनियर के.एस. परिहार भी जुड़े हुए हैं। मालवा और महाकौशल के अधिकांश जिलों में सपाक्स समाज की जिला इकाइयों का गठन हो चुका है।

कर्मचारी संगठन से अलग सपाक्स समाज
प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी संगठन सपाक्स से अलग सपाक्स समाज नाम की संस्था खड़ी की गई है। सूत्रों के मुताबिक चूंकि सपाक्स से जुड़े कर्मचारी सीधे आरक्षण का विरोध और राजनीतिक दलों के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते, इसलिए सपाक्स समाज में रिटायर्ड अफसरों के लिए पार्टियों को घेरने की रणनीति बनाई गई है। नौकरी के दौरान सरकार की हर हां में हां मिलाने वाले ये अफसर रिटायर होने के बाद अचानक सरकार के खिलाफ ही लामंबद होने लगे हैं।

सपाक्स समाज की मांगें
-आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए।
-जिस परिवार को एक बार आरक्षण का लाभ मिल जाए, उसे दोबारा ना मिले।
-प्रमोशन में आरक्षण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए।

भाजपा विधायक ने की आरक्षण पुनर्विचार की मांग
खातेगांव के भाजपा विधायक अशाीष शर्मा ने भी देश में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में पुनर्विचार की बात उठाई है। पत्रिका से चर्चा में कहा, आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था पुरानी हो चुकी है। इसका कुछ लगातार लाभ लेते रहे और कुछ पात्र होकर भी वंचित रह गए। इस व्यवस्था पर विचार हो। आर्थिक आधार पर आरक्षण उनका व्यक्तिगत मत है।

संगठन गैर राजनीतिक है। हम मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं, ताकि वे अगले चुनाव में उस उम्मीदवार को वोट करें, जो आर्थिक आधार पर ही आरक्षण की बात करता हो।
-एच.एल.त्रिवेदी, संरक्षक सपाक्स समाज