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MP में यहां जो भी CM आया चली गई उसकी कुर्सी! योगी ने तोड़ा था नोएडा का मिथ

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सीएम शिवराज 13 साल से इस जिले के किसी भी कार्यक्रम में नहीं आए।

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Political MYTH of MP

भोपाल। मध्यप्रदेश के एक जिले से अजीब सा अंधविश्वास जुड़ा हुआ है। जिसे कोई भी सीएम तोड़ता हुआ नहीं दिखता। इस जिले के संबंध में माना जाता है कि जब भी कोई सीएम यहां आता है तो उसकी कुर्सी चली जाती है। जी हां हम बात कर रहे है मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की। यहां के इस मिथक को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नहीं तोड़ पा रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सीएम शिवराज 13 साल से इस जिले के किसी भी कार्यक्रम में नहीं आए। उनके लिए ये मिथक चुनौती बना हुआ है। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि जब भी कोई सीएम यहां जाता है तो उसके हाथ से कुर्सी चली जाती है।

दरअसल सीएम ने पिछले दिनों अशोकनगर से 15 किलोमीटर दूरी पर पिपरई तहसील में सभा की। यह 2 माह में उनका जिले का तीसरा दौरा था। यहां पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि योगी आदित्यनाथ नोएडा जा सकते हैं तो आप अशोकनगर क्यों नहीं आते। इस सवाल से अचकचाए सीएम ने कहा, क्यों नहीं आएंगे, जरूर आएंगे।

योगी और नोएडा...
वहीं इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 साल बाद सीएम के तौर पर नोएडा गए और उस बड़े मिथक को तोड़ा, जिसके कारण 29 साल से कोई मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जा रहा था। 29 साल पहले तक जो भी सीएम नोएडा गया, उसे कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके पहले 1988 में सीएम वीर बहादुर गए थे, जिन्हें बाद में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मिट रहा है नामोनिशान
वहीं पिपरई मंडी परिसर में आयोजित किसान सम्मेलन में पहुंचते ही सीएम चौहान ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं सीधे गुजरात से रहा हूं, जहां आज भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण की। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में 18 मुख्यमंत्री भाजपा के शामिल हुए। चारों तरफ कांग्रेस मिट चुकी है। पंजाब और कर्नाटक बचा है। कर्नाटक में अप्रैल में चुनाव है, वहां भी भाजपा की सरकार बनेगी और कांग्रेस का पत्ता साफ कर हो जाएगा।

नोएडा और अशोकनगर का मिलताजुलता मिथक...
दरअसल यूपी के नोएडा के संबंध में ऐसा मिथक है कि यहां जाने के बाद सीएम को कुर्सी छोड़नी पड़ती है। वहीं ऐसी ही बात अशोकनगर के बारे में माना जाता है कि यहां जो भी सीएम गया, उसने कुर्सी गवां दी।
चाहे वे मोतीलाल वोरा हों, अर्जुन सिंह या दिग्विजय सिंह हर किसी के बारे में माना जाता है कि वे अशोकनगर गए और उन्हें सीएम की कुर्सी गंवानी पड़ी।

सीएम शिवराज सिंह भी पिछले दिनों अशोकनगर जिले की पिपरई तहसील में रैली करने गए, लेकिन वे अशोकनगर नहीं गए। जिसके बाद इस मिथक को एक बार फिर हवा मिल गई है। और इन दिनों ये यहां की क्षेत्रीय जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बार ऐसे मौके आए, जब पूरी तैयारी हो गई और आखिरी समय में कार्यक्रम कैंसिल हो गया।
- दरअसल अशोकनगर में एक ही राजा, राजेश्वर माने जाते हैं, जिनका शहर के बीचोंबीच मंदिर है।
कुछ महीने पहले कलेक्टोरेट के भवन के उद्घाटन में भी सीएम आने वाले थे। लेकिन, लास्ट मूवमेंट पर उनका कार्यक्रम कैंसिल हो गया ।