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रोल के अनुसार एक्टर को करना होता है मेकअप

एमपीएसडी के नए सत्र में स्टूडेंट्स सीख रहे थिएटर की बारिकियां

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रोल के अनुसार एक्टर को करना होता है मेकअप

भोपाल। मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के नए सत्र में स्टूडेंट्स को थिएटर की बारिकियों से रू-ब-रू कराया जा रहा है। उन्हें थिएटर के साथ एक्टिंग, मेकअप और योग के बारे में भी बताया जा रहा है। कलकत्ता से आए मेकअप आर्टिस्ट संजय सामंत ने गुरुवार को इन युवा कलाकारों को मेकअप की बारिकियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि थिएटर में इसकी कितनी इंपोर्टेस है। उन्होंने रियलिस्टिक और इफैफ्टिव मेकअप के बारे में बताया।

क्लास में उ्नहोंने बताया कि रियलिस्टिक में मेकअप ज्यादा तड़क-भड़क वाला नहीं किया जाता। सीन की डिमांड और केरेक्टर के हिसाब से सिर्फ चेहरे पर हल्का मेकअप यूज किया जाता है। इस दौरान स्टूडेंट्स ने एक दूसरे का मेकअप कर प्रेक्टिकल भी किया। संजय ने जुवेनाइल मेकअप बताते हुए फेशियल शेड्स के बारे में जानकारी दी।

थिएटर आर्टिस्ट के लिए अपनी परफॉर्मेंस से पहले उसका मेकअप जरूरी होता है। मेकअप में फेस पर 27 डिवीजन मौजूद होते हैं और इनमें किस तरह के शेड इस्तेमाल किए जाते हैं, इससे जुड़ी सभी जानकारियों से उन्होंने स्टूडेंट्स को रू-ब-रू कराया।

संगीत सुन किया इमेजिनेशन

इससे पहले आलोक चटर्जी ने स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक मैथड एक्टिंग के बारे में बताया। उन्होंने स्टूडेंट्स को संतूर की एक धून सुनाई। उन्होंने सरसो का खेत, झील और जंगल के बारे में वर्णन करते हुए इसकी धुन में उसे तलाशने को कहा। उन्होंने बताया कि थिएटर आर्टिस्ट को संगीत के हिसाब से खुद को एक्ट करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

यदि संगीत हिसाब से एक्ट नहीं किया तो दर्शकों को ये बहुत ही खराब लगेगा। स्टूडेंट्स को अखिलेश रायजादा योग और केके राजन थिएटर हिस्ट्री के बारे में पढ़ा रहे हैं। उन्हें भारतीय नाट्य शास्त्र से लेकर ग्रीक के थिएटर इतिहास के बारें में बताया जा रहा है। साथ ही स्टूडेंट्स को थिएटर की उतपत्ति,विकास के मानव यात्रा के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।