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‘जिस पर श्रद्धा रखते हो उस पर कभी अविश्वास मत करो’

धर्मसभा में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज बोले- आंखें खुली रखें या बंद रखें, यह जीवन रूपी नौका में महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि बुद्धि को खुला, सचेत, सक्रिय तथा सजग रखा जाए। 

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Manish Geete

Dec 23, 2016

acharya vidyasagarji maharaj

acharya vidyasagarji maharaj


सिलवानी (रायसेन)/भोपाल. आंखें खुली रखें या बंद रखें, यह जीवन रूपी नौका में महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि बुद्धि को खुला, सचेत, सक्रिय तथा सजग रखा जाए। आंखें तो बाहरी क्रियाकलाप जानने के साधन हैं, जबकि बुद्धि से जीवन संवरता है, सात्विकता आती है।

यह उपदेश आचार्य विद्यासागर महाराज ने श्रावकों को दिए। वह गुरुवार को अपने व्याख्यान में कार्यक्रम में श्रावकों को जीवन में विश्वास शब्द की महिमा को विस्तार से समझा रहे थे। आचार्यश्री ने कहा कि जिस वस्तु पर विश्वास रखते हो, श्रद्धा रखते हो उस वस्तु पर कभी भी अविश्वास मत करो। अविश्वास करने से मन विचलित होता है। विश्वास रखा जाना आवश्यक ही नहीं अति आवश्यक भी है। विश्वास करने और विश्वास रखे जाने से मन प्रसन्न होना है, तथा कार्य भी सुचारू रूप से चलता है।


आचार्य श्री ने कहा कि संयम के बगैर जीवन पथ पर आरूढ़ नहीं हुआ जा सकता है। संयम का जीवन में वैसा ही महत्व है, जैसा कि सूर्य और चंद्रमा का है। जब सूर्य उदय होकर धूप बिखेरता है, तब चंद्रमा ओझल हो जाता है। जब चंद्रमा अपनी चांदनी फैलाता है, तब सूर्य आसमान पर दिखाई नहीं देता है। ठीक इसी तरह संयम का जीवन में महत्व है। वाहन चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग न करने की ओर सचेत करते हुए कहा कि कभी भी वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग खतरनाक हो सकता है।


आहारचर्या ब्रह्मचारी दीदियों ने कराई संपन्न
प्रतिभा मंडल इंदौर से आचार्य विद्यासागर महाराज के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने आई ब्रह्मचारी दीदियों ने आचार्यश्री का पडग़ाहन कर आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त पाद प्रक्षालन इम्फाल (आसाम )से आए मालिक चंद्र पहाडिय़ा के द्वारा किया गया। जबकि शास्त्र भेंट उत्तम चंद्र जैन बेगमगंज के द्वारा किया गया।


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