26 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बिना जांच कह दिया ‘कैंसर है’ और निकाल दी बच्चेदानी; एमपी में सैकड़ों केस से मचा हड़कंप

Hysterectomies- हद दर्जे की लापरवाही: डॉक्टर का पंजीयन निलंबित, नरसिंहपुर में सैकड़ों बच्चेदानी निकालने वाले डॉक्टर पर भी एक्शन

2 min read
Google source verification
Hysterectomies-

Hysterectomies-Demo Pic

Hysterectomies- यूरिन इंफेक्शन के इलाज के लिए आई महिला की बिना जांच और उचित कारण के बच्चेदानी निकालने वाली जावरा, रतलाम की डॉक्टर पूजा देवड़ा का पंजीयन मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल ने तीन माह के लिए निलंबित कर दिया है। इसी तरह नरसिंहपुर जिला अस्पताल में 9 माह में 599 बच्चेदानी निकालने वाले दो डॉक्टरों में से एक डॉ. आरके सिंघई पर नौ साल बाद कार्रवाई कर पंजीयन 15 दिन के लिए निलंबित किया गया है। एक अन्य डॉक्टर डीपी सिंह की इस बीच मौत हो चुकी है। इन पुरुष डॉक्टरों द्वारा महिलाओं की बच्चेदानी निकालने का मुद्दा पत्रिका ने 21 सितंबर 2017 को उठाया था। इस संबंध में काउंसिल के विशेष अधिकारी और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त धनराजू एस ने आदेश जारी किए हैं।

डॉक्टर ने बिना सोनोग्राफी और कोई टेस्ट किए बताया कि पेट में है कैंसर की गठान

पिपलौदा की यशोदा पवार यूरिन इंफेक्शन के चलते जावरा के पाटीदार अस्पताल में डॉ. पूजा देवड़ा को दिखाने गई थीं। डॉक्टर ने बिना सोनोग्राफी और कोई टेस्ट किए बता दिया कि पेट में कैंसर की गठान है। इसके बाद उन्होंने कोई भी जांच नहीं कराई और ऑपरेशन कर दिया। सेहत नहीं सुधरी तो डॉक्टर ने कहा, बच्चादानी निकालने के कारण समस्या हो रही है।

नरसिंहपुर अस्पताल में नौ माह में 599 बच्चेदानी निकालने का सबसे पहले पत्रिका ने उठाया था मुद्दा

नरसिंहपुर अस्पताल में नौ माह में 599 बच्चेदानी निकालने का मुद्दा पत्रिका ने 21 सितंबर 2017 को उठाया था। स्वास्थ्य संचालनालय ने क्षेत्रीय संचालक से जांच कराई। डॉ. डीपी सिंह और डॉ. आरके सिंघई द्वारा लापरवाही, तय प्रोटोकॉल और मेडिकल इथिक्स का पालन नहीं करने की पुष्टि हुई।

महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने से सर्जन ही हिस्ट्रेक्टॉमी के ऑपरेशन कर रहे

इधर दोनों डॉक्टर्स ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही। बताया कि महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने से सर्जन ही हिस्ट्रेक्टॉमी के ऑपरेशन कर रहे हैं। हालांकि कमेटी ने डॉ. डीपी सिंह और डॉ. आरके सिंघई के तर्क नहीं माने। दोनों को प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का दोषी माना। इसके बाद डॉ. डीपी सिंह और डॉ. आरके सिंघई को स्वास्थ्य संचालनालय ने निलंबित कर दिया। 2021 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी।

डॉ. डीपी सिंघई का पंजीयन 15 दिन के लिए निलंबित

इसी बीच डॉ. आरके सिंह की मौत हो गई, लेकिन काउंसिल में मामला चलता रहा। अब डॉ. डीपी सिंघई का पंजीयन 15 दिन के लिए निलंबित करने के आदेश दिए गए हैं।