23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फीस में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी, प्राइवेट स्कूलों में केजी में एक लाख में होगा एडमीशन

स्कूलों की मनमानी: फीस एक्ट के प्रावधान का गलत फायदा उठा रहे हैं निजी स्कूलअफसर बोले-'दर्द' है तो अभिभावक करें शिकायत, निजी और मिशनरी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चालू

2 min read
Google source verification
nursery_school.png

स्कूलों की मनमानी:

उमा प्रजापति, भोपाल. राजधानी के कई निजी स्कूलों में केजी की एडमीशन फीस एक लाख तक Admission in KG in private schools for one lakh पहुंच गई है। इसे एडमीशन फीस, ट्यूशन फीस आदि मद में वसूला जा रहा है। इसके अलावा साल भर में ली जाने वाली फीस अलग है। यही नहीं शहर के कई मिशनरीज और निजी स्कूलों ने इस साल फीस में कम से कम 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। लेकिन, स्कूल शिक्षा विभाग के अफसर मौन हैं। उनका कहना है कि फीस का दर्द है तो अभिभावक शिकायत करें। फिर मामले की जांच होगी।

निजी स्कूलों की फीस नियंत्रण के लिए तीन साल पहले राज्य में कानून बना था। लेकिन, अधिकारियों के ढुलमुल रवैये का फायदा उठाते हुए निजी स्कूल संचालक हर साल फीस बढ़ा रहे हैं। इस तरह वे कानून की पालना भी कर रहे हैं और जेब भी भर रहे हैं।

इस साल भी शहर में नामीगिरामी निजी स्कूलों ने 5 से 6 हजार रुपए तक फीस बढ़ दी है। कई बड़े स्कूल एडमिशन फीस के नाम पर 50 से एक लाख तक वसूल रहे हैं। फीस बढ़ाने के पीछे उनका तर्क है कि फीस विनियमन अधिनियम में 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने का नियम है। यह बढ़ोतरी उसी के तहत है। स्कूलों की इस मनमानी पर अधिकारी चुप हैं।

भोपाल के संभागीय शिक्षा अधिकारी अरविंद चौरबड़े के अनुसार स्कूलों ने यदि 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है और शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। एक्ट के तहत अभिभावक स्कूलों से फीस बढ़ाने का कारण पूछ सकते हैं। फीस युक्ति संबंध नहीं है, तो शिकायत कर सकते हैं।

नियम में यह प्रावधान
प्राइवेट स्कूलों के फीस स्ट्रेक्चर को लेकर बनाए गए नियमों में कई कड़े प्रावधान रहैं। निजी स्कूल हर साल 10 से 15 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते।
अधिक फीस वसूलने पर स्कूल प्रबंधन पर 2 लाख रुपए तक का अर्थदंड और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
दूसरी बार शिकायत सही पाए जाने पर अर्थदंड दोगुना। फीस बढ़ाने के लिए स्कूल को अपनी आमदनी और खर्चे दिखाना होंगे।
पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में 10 से अधिक और 15 प्रतिशत या उससे कम है तो जिला समिति को भेजना होगी, वह इस पर 45 दिन में निर्णय लेगी।
फीस वृद्धि 15 प्रतिशत से ज्यादा है तो जिला समिति 7 दिन में अपने अभिमत के साथ राज्य समिति को भेजेगी।
जिला समिति निजी विद्यालय के प्रबंधन से ऐसी अतिरिक्त जानकारी या साक्ष्य मांग सकेगी कि वह फीस क्यों बढ़ा रहे हैं।
फीस बढ़ाने पर निर्णय लेने से पहले समिति स्कूल प्रबंधन और छात्रों या पालक संगठनों का पक्ष भी लेना होगा।

शिक्षा विभाग ने नहीं मांगा फीस का विवरण
राजधानी के सीबीएसई स्कूलों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू है, लेकिन अब तक स्कूल शिक्षा विभाग ने फीस का लेखा-जोखा स्कूलों से नहीं मांगा है। न ही तीन साल के ऑडिट के आधार पर फीस तय की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों की तरफ से फीस को लेकर कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई होगी।

यहां कर सकते हैं फीस की शिकायत
राज्य सरकार ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी रोकने के लिए फीस नियामक समिति बनाई है। अभिभावक 181 या कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों की शिकायत कर सकते हैं।