
advocate protest
भोपाल. प्रदेश भर की अदालतों में सोमवार को वकीलों ने मुकदमों में पैरवी नहीं की। हाईकोर्ट में रिक्त पदों पर न्यायाधीशों की शीघ्र नियुक्ति, प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और प्रदेश भर में वकीलों के खिलाफ दर्ज हो रहे झूठे मुकदमों, वकीलों पर जानलेवा हमलों के विरोध में प्रदेश भर के वकीलों ने अदालत के कामकाज में भाग नहीं लिया। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश व्यास के नेतृत्व में विभिन्न मांगों को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। बाद में वकीलों ने कोर्ट परिसर के बाहर आकर अरेरा हिल्स मेन रोड पर जाम कर दिया।
करीब १० मिनट चले चक्काजाम के दौरान वकीलों ने प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। चक्काजाम से मेन रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। चक्काजाम की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। बाद में एसडीएम ने आकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नाराज वकीलों से लिया। इस दौरान एसोसिएशन के सचिव पीसी कोठारी, उपाध्यक्ष सपना चौधरी, अधिवक्ता मोहम्मद रियाज उद्दीन, खालिद हफीज सहित बड़ी संख्या में वकील मौजूद थे।
राज्य अधिवक्ता परिषद के आव्हान पर प्रदेश भर में वकीलों ने पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया था। जिला अदालत में वकीलों के पैरवी नहीं करने से मुकदमों में आगे की तारीख तय कर दी गई। दिनभर बार एसोसिएशन के बाहर वकील प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की महत्ता और जरूरत पर विचार व्यक्त करते रहे। वकीलों के पैरवी नहीं करने के कारण एनजीटी में भी एक दर्जन से अधिक प्रकरणों में सुनवाई नहीं हो सकी। इन प्रकरणों को आगे बढ़ा दिया गया है। इसी प्रकार राजस्व न्यायालयों में भी कामकाज प्रभावित रहा।
वकीलों की मांगें
राज्य अधिवक्ता परिषद के सचिव मेहबूब अंसारी ने बताया कि हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के ५५ पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में सिर्फ ३३ पद पर न्यायाधीश कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही इनमें से ७ न्यायाधीश रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में हार्ईकोर्ट में मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस संबंध में कई बार राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से भी चर्चा की गई है। बावजूद इसके आज तक नये जजों की नियुक्ति नहीं हुई है। दूसरी ओर प्रदेश में वकीलों पर हो रहे हमलों के चलते प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग और पुलिस द्वारा वकीलों के खिलाफ बिना जांच के झूठे मुकदमे दर्ज करने के विरोध में पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया था।
Published on:
09 Jan 2018 10:25 am
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