28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आखिर राजेश के मुंह से बार-बार क्यों निकलते थे ऐसे शब्द, मैं मरूं तो ऐसा कर देना……..

- अपनी देह के अंगों से तीन लोगों को जीवन दे गए राजेश अवस्थी - परिजनों को समझाया तो पत्नी सुषमा अवस्थी अंगदान के लिए तैयार हो गईं,- पुलिस बैंड के द्वारा अंतिम यात्रा निकाली गई, अस्पताल में फूलों की वर्षा की

2 min read
Google source verification
आखिर राजेश के मुंह से बार-बार क्यों निकलते थे ऐसे शब्द, मैं मरूं तो ऐसा कर देना........

परिजनों को समझाया तो पत्नी सुषमा अवस्थी अंगदान के लिए तैयार हो गईं,


भोपाल. राजेश रोजाना की तरह स्कूटी से अपने कार्यालय जा रहे थे। प्लेटिनम प्लाजा के नजदीक उनकी स्कूटी एक अन्य स्कूटी से टकराई और वह गिर गए। राजेश उसी दिन बिना हेलमेट के घर से निकले थे, जब वह गिरे तो उनके सिर में गहरी चोट लग गई। उनको बंसल अस्पताल ले जाया गया, ब्रेन सर्जरी के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। न्यूरो-सर्जन और इंटेंसिविस्ट, अधिकृत विशेषज्ञ सहित 4 डॉक्टरों वाली बंसल अस्पताल की ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी द्वारा जांच और एपनिया परीक्षण सहित मेडिकल जांच के बाद उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया। परिवार के लोगों को अंगदान के बारे में जानकारी दी तो पत्नी सुषमा अवस्थी इसके लिए तैयार हो गईं। हालांकि राजेश भी अंगदान करने की अपनी अंतिम इच्छा के बारे में कई बार परिजनों को बता चुके थे। ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो ) को सूचना दी गई। सोटो द्वारा लिवर बंसल अस्पताल एवं दोनों किडनी भोपाल के ही दो निजी अस्पताल को दी गईं।

आधे घंटे तक किसी ने नहीं की मदद
परिजन पृथ्वीराज त्रिवेदी ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद करीब आधे घंटे तक राजेश अवस्थी उम्र 53 साल प्लेटिनम प्लाजा के सामने सड़क पर बेसुध पड़े रहे। किसी ने उनकी मदद नहीं की, करीब आधे घंटे बाद एक महिला ने अपनी कार से उन्हें 1250 अस्पताल पहुंचाया। वहां से उन्हें बंसल अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही परिजनों को सूचना भी दी। इलाज करने वाले डॉक्टरों ने पहले ही साफ कर दिया था कि मरीज की हालत बहुत क्रिटिकल है। ब्रेन सर्जरी के बाद भी उसे बचाने के सिर्फ एक परसेंट चांस ही है। शुक्रवार शाम आठ बजे उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। राजेश अवस्थी होंडा शोरूम में सेल्स का कार्य करते थे। उनकी पत्नी सुषमा और 17 साल के बेटे अक्षत अवस्थी के अनुसार राजेश अक्सर कहा करते थे कि अगर वे किसी घटना शिकार हो जाएं तो उनके अंग दान किए जाएं।

एक लिवर व दो किडनी से तीन जिंदगी रोशन
राजेश की दोनों किडनी और लिवर से तीन को नई जिंदगी मिली। लिवर बंसल अस्पताल में ही एक मरीज को दिया गया। वहीं एक किडनी अपोलो सेज अस्पताल और एक किडनी चिरायु अस्पताल में भर्ती मरीज में ट्रांसप्लांट होगी।

पुलिस बैंड द्वारा अंतिम यात्रा निकाली गई, फूलों की बरसात की

पूरे सम्मान के साथ पुलिस बैंड द्वारा अंतिम यात्रा निकाल कर अंतिम विदाई दी। अस्पताल के कॉरिडोर को पुष्प से सजाया गया । बंसल अस्पताल परिसर से अंतिम विदाई दे कर परिजनों के इस अंग दान का कठिन निर्णय लेने पर परिजनों का सम्मान भी किया।