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चार साल तक थिएटर में सीखी एक्टिंग की बारीकियां फिर बतौर लीड साइन की पहली फिल्म

2 साल की उम्र में समझ में आया कि ...ये सरोद नहीं आसांदस में रोल करने के बाद समझ आया ...ये एक्टिंग नहीं आसां

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Asim ali

चार साल तक थिएटर में सीखी एक्टिंग की बारीकियां फिर बतौर लीड साइन की पहली फिल्म

भोपाल। मैंने 12 साल की उम्र तक सरोद सीखा और मैं समझ गया था कि यह आसान काम नहीं हैं। उस्ताद की उपाधि मिलने में 40-50 साल लग जाते हैं, मेरे अंदर इतना लंबा पेशेंस नहीं था, इसलिए मैंने एक्टिंग को चुना। मुम्बई गया तो शुुरुआती दौर में बहुत अच्छे ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग की।

कई मैगजीन और म्यूजिक वीडियो भी किया। एक वीडियो को देख अनुभव सिन्हा सर ने मुझे बुलाया और दस फिल्म में मुझे रोल दिया। उसमें मेरा कैरेक्टर दीया मिर्जा के फियॉन्से का था और आतंकवादी के हाथों मारा जाता है। इस फिल्म के बाद समझ में आया कि सिर्फ के सामने खड़े हो जाना ही एक्टिंग नहीं है लिहाजा मैंने थिएटर ज्वाइन किया और करीब 4 साल तक एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद बतौर लीड एक्टर मैंने पहली फिल्म जिंदगी तेरे नाम की।

यह कहानी है देश में सरोद परम्परा को जीवित रखने वाले ग्वालियर घराने से ताल्लुक रखने वाले बॉलीवुड एक्टर असीम अली खां की। असीम उस्ताद अमजद अली खां के भतीजे हैं। असीम के पिता उस्ताद रहमत अली खां खुद एक मशहूर सरोद वादक थे।

10 अगस्त को असीम की फिल्म पेज-16 रिलीज होने वाली है, फिल्म के बारे में बात करने के लिए बुधवार को वे पत्रिका ऑफिस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी लाइफ से जुड़े कई एक्सपीरियंस शेयर किए।

अमजद अली खां बोले- जो भी करो उससे इस घर का नाम रोशन हो

असीम बताते हैं कि घर में शुरू से संगीत का माहौल रहा है। पापा रहमत अली खान, चाचा अमजद अली खान, भाई अमीन और कजिन अमान-अयान को सरोद की परंपरा को आगे बढ़ाते देखा, लेकिन मुझे कुछ अलग करना था। इसलिए मैंने पहले मॉडलिंग और फिर एक्टिंग में कदम रखा। असीम ने बताया कि मेरी मां आकाशवाणी की अनाउंसर थी और पूरे घर में संगीत का माहौल था लिहाजा एक्टिंग की राह चुनना मेरे लिए आसान नहीं था।

जब मैंने घर पर बताया कि मैं एक्टिंग और मॉडलिंग करना चाहता हूं तो अमजद अली खां साहब ने कहा कि जो भी करो इस घर का नाम रोशन हो, क्योंकि इस घर का नाम देश-विदेश में बहुत सम्मान से लिया जाता है। बस, ऐसा कुछ मत करना कि नाम को नुकसान पहुंचे। इसलिए मैं कोई भी प्रोजेक्ट चूज करता हूं। मैंने सरोद से कभी पल्ला नहीं झाड़ा। पिछले 16 सालों से मैं अपनी मां के साथ उस्ताद हाफिज अली खां संगीत एकेडमी संचालित कर रहा हूं। इसके जरिए हम न्यूकमर्स को प्लेटफॉर्म प्रोवाइड करते हैं।

एलपी पर देखता था बच्चन साहब की फोटो
असीम ने बताया कि मेरी मम्मी आकाशवाणी में एनाउंसर थी। बचपन में मैं उनके स्टूडियो में होमवर्क करने जाया करता था। स्टूडियो में मौजूद एलपी पर जब मैं आनंद, जंजीर, दीवार, कालिया जैसी फिल्मों की फोटोज देखा करता था तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। खासतौर पर बच्चन साहब को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ, वो मेरे ऑल टाइम फेवरेट एक्टर भी हैं।

फिल्म साइन करने के बाद भी डाउट था

असीम ने बताया कि इस फिल्म के शमशाद पठान डायरेक्टर हैं, इससे पहले वो एक फिल्म 'उस दिशा मेंÓ में बना चुके हैं। मुझे कहानी अच्छी लगी और टेक्नीशियंस भी अच्छे थे इसलिए मैंने फिल्म के लिए हां कहा। शुरुआत में मुझे डाउट था लेकिन मैंने उन पर विश्वास किया, फाइनली ट्रेलर देखकर अच्छा लगा। फिल्म की शूटिंग गुजरात, मुम्बई और जयपुर में हुई है। फिल्म में मेरे अपोजिट बिदिता बाग हैं, फिल्म में किरण कुमार जी और ओंकार नाथ नत्था भी हैं।

फिल्म के बारे में
पेज-16 एक सुपरनेचुरल थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की कहानी एक महत्वाकांक्षी बिल्डर अजय की है, जिसकी जिन्दगी एक किताब के पन्ने 16 से बदल जाती है। अजय अपने बेटे हर्ष के लिए एक किताब खरीद कर लाता है, जब वह पेज 16 पर पहुंचता है तो वहां उसका पास्ट और प्रेजेंट दोनों एक एक दूसरे से उलझ जाते हैं।