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स्थानीय नेताओं के असहयोग के बाद प्रज्ञा को जीताने के लिए RSS ने उतारे 28 संगठन

विभिन्न प्रकल्पों और प्रकोष्टों के पदाधिकारियों को भी दिए निर्देश    

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loksabha elections 2019

लोकसभा चुनाव 2019 : कांग्रेस में सीएम ‘फ्रंट फुट’ पर तो ‘बैक स्टेज’ माहौल भांपने में जुटा आरएसएस

भोपाल. लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर को जीताने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने कमर कस ली है। शुक्रवार को संघ ने साध्वी प्रज्ञा को संघ कार्यालय समिधा भी तलब कर चुनाव की रणनीति पर जानकारी ली।

प्रज्ञा को टिकट देने के बाद से स्थानीय भाजपा विधायक, पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं का असहोग मिल रहा है। लगातार इसकी रिपोर्ट समिधा और संघ को मिल रही थी। स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा प्रज्ञा के चुनाव प्रचार में दिलचस्पी भी नहीं ली जा रही है।

इसके चलते संघ पदाधिकारियों ने संघ, संघ की विचारधारा से जुड़े संगठन और पार्टी के विभिन्न प्रकोष्टों के पदाधिकारियों को चुनाव में सक्रिय कर दिए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि यह सीट कैसे भी करके जीतना है। जीत के लिए सभी संगठनों ने अपने-अपने तरीके से घर-घर जाकर प्रज्ञा ठाकुर को जीताने का लक्ष्य दिया गया है।

अकेले भोपाल के 28 संगठन अनुशंगी संगठनों सहित करीब 20 राजनीतिक प्रकोष्टों और प्रकल्पों पदाधिकारियों को भी चुनाव प्रबंधन और सीट जीताने का लक्ष्य दिया है। सभी को अलग-अलग क्षेत्रों की कमान सौंपी गई हैं, ताकि अधिक से अधिक मतदान प्रज्ञा के पक्ष में करवा सके। संघ पदाधिकारियों ने इसे मतदान जागरुकता अभियान नाम दिया है।

चुनाव में स्थानीय नेताओं की अरुचि के कारण सभी संगठनों, पदाधिकारियों को कहा गया है कि कांग्रेस द्वारा जीती गई उत्तर, मध्य और दक्षिण पश्चिम सीटों पर ध्यान दिया जाए।

विशेषकर दक्षिण पश्चिम सीट पर फोकस करने को कहा गया। वहीं भाजपा द्वारा जीती गई बैरसिया, हुजूर, नरेला और गोविंदपुरा सीटों पर उन बूथ पर जोर देने का लक्ष्य दिया गया हैं, जिन पर विधानसभा में भाजपा को कम वोट मिले थे।

इसके चलते उन्होंने ऐसे बूथ पर मतदान बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। नरेंद्र जैन, क्षेत्र प्रचार प्रमुख, मध्यक्षेत्र कार्यकारिणी भोपाल का कहना है कि हमारे लिए पूरा देश है जहां मतदाताओं को जागरुक करना है। यह हमाा घोषित लक्ष्य है। इसके अनुसार हम काम कर रहे हैं।

इन संगठनों को उतारा मैदान में

विद्या भारती, एबीवीपी, विश्व हिंदू परिषद, वनवासी कल्याण परिषद, विज्ञान भारती, संस्कार भारती, विद्या भारती, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, राष्ट्रीय सिख संगत, भारत विकास परिषद, आरोग्य भारती, सक्षम, हिंदू जागरण मंच, इतिहास संकलन समिति, सहकार भारती, लघु उद्योग भारती, प्रज्ञा प्रवाह, संस्कार भारती, अर्चना प्रकाशन, राष्ट्र सेविका समिति,

अखिल भारतीय शिक्षण मंडल, मप्र शिक्षक संघ, ग्राहक पंचायत, सेवा भारती, अखिल भारतीय साहित्य परिषद सहित 14 प्रकल्पों को भी सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। वहीं, बुद्धीजीवी प्रकोष्ट, व्यवसायिक, चिकित्सा, व्यापारी, सहकारिता, ग्रामीण विकास पंचायती राज बुनकर, मछुआरा, पीएम जनकल्याण योजना, सीएम योजना, विधि, झुग्गी-झोपड़ी, खेल, शिक्षक, आर्थिक,

सैनिक, सांस्कृतिक एवं कला, विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्ध घुमक्कड़ प्रकोष्टों और इनसे जुड़े भाजपा-संघ के अन्य निजी संगठनों को भी अलग-अलग दायित्व सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह चुनाव भाजपा नहीं, कांग्रेस और आरसएस के बीच हो रहा है। इसे ध्यान में रखकर इन संगठनों के उप संगठनों को भी मैदान में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।