
भोपाल. जीवन की गाड़ी चलाने के लिए दो पहियों की आवश्यकता होती है, लेकिन कई बार कुछ एेसे हादसे हो जाते हैं, कि जीवनसाथी का साथ छूट जाता है, और रह जाता है सिर्फ संघर्ष। कई लोग एेसी पीड़ा से गुजरते हैं, लेकिन लोक लाज के डर से वे फिर से अपना जीवन नहीं बसा पाते, लेकिन आज भी इस समाज में कई लोग एेसे भी है, जो नई सोच के साथ आगे आकर फिर से अपनों की जिंदगी बसाने के लिए सहयोग करते हैं।
रविवार को हिन्दी भवन में आयोजित अग्रवाल, वैश्य समाज के कल्याणी, विधुर, तलाकशुदा, दिव्यांगों के परिचय सम्मेलन में इस तरह के उदाहरण देखने के लिए मिले। जहां बेटी और दामाद ने अपनी मम्मी के लिए मंच पर आकर रिश्ता ढूंढने की पहल की, वहीं कुछ सास ससुर भी अपनी बहू के लिए रिश्ता ढूंढने पहुंचे। परिचय देने के दौरान मंच पर कई बार भावुक पल भी नजर आए और पुरानी बाते याद कर उनकी आंखे नम हो गई। कई दिव्यांग व्हील चेयर पर भी परिचय देने पहुंचे और उन्होंने अपनी पसंद नापसंद बताई।
बेटे की मौत का दुख है, पर बहू को खुश देखना चाहता हूं
पिपरिया से आए रामगोविंद अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल सड़क हादसे में मेरे बेटे की मौत हो गई थी। वह ३३ साल का था, और उसकी मौत ने मुझे पूरी तरह तोड़ दिया। भला यह भी कोई उम्र होती है, मौत की। बहू के सामने पहाड़ की तरह जिंदगी खड़ी है। इसलिए मैंने तय किया कि चाहे कुछ हो जाए, बहू की शादी बेटी की तरह करूंगा और स्वयं कन्यादान करूंगा। इसलिए उसके लिए योग्य रिश्ता ढूंढ रहा हूं, ताकि वह खुश रह सके।
मां बनकर बेटी ने की मां के रिश्ते के लिए पहल
सम्मेलन में एक ५० वर्षीय महिला भी परिचय देने के लिए पहुंची थी। वह भोपाल जिले की ही रहने वाली है। उसके साथ उसकी बेटी और दामाद ने भी मंच पर उस मां के लिए परिचय दिया और बेटी ने उसके संघर्ष की कहानी बयां की। महिला के पति २० साल पहले उसे छोड़कर चले गए थे, उस समय बेटी बहुत छोटी थी। बेटी को पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। कपड़े बेचे, अस्पताल में काम किया, और कुछ साल पहले ही बेटी की शादी हो गई। अब वह अकेली रहती है। इसलिए बेटी और दामाद चाहते हैं कि उनकी शादी हो जाए, ताकि वे बेहतर जिंदगी जी सके।
बच्चे की अच्छी परवरिश हो इसलिए करना चाहती है शादी
भोपाल निवासी कंचन के पति की भी बीमारी के कारण मौत हो गई है। बच्चे की अच्छी देखभाल के लिए वे जॉब करती है। उसका एक चार साल का बेटा है, जो स्कूल जाता है। वह अकेले रहती है। ससुराल वाले तो नहीं चाहते हैं कि शादी हो, लेकिन मायके के लोग चाहते हैं। मेरे बेटी को अच्छी शिक्षा मिले, इसलिए मैं शादी के लिए राजी हुई हूं।
समाजसेवियों का हुआ सम्मान
अग्रवाल चेतना वैवाहिक पत्रिका की ओर से आयोजित इस नि:शुल्क परिचय सम्मेलन के लिए ८०० से अधिक बायोडाटा आए थे, जबकि २०० से अधिक प्रतिभागियों ने मंच पर आकर परिचय दिया। इस मौके पर महिला और बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस , मनमोहन अग्रवाल, डीपी गोयल, संजीव अग्रवाल, सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया।
Published on:
09 Apr 2018 10:08 am
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