
भोपाल : सरकार के ताजा आंकड़ों ने प्रदेश की पिछली शिवराज सरकार के दावों की हवा निकाल दी। सरकार ने 2012-13 से 2018-19 तक के कृषि विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कृषि विकास दर 2 फीसदी से लेकर 10 फीसदी तक ही पहुंची है। तत्कालीन शिवराज सरकार ने दावा किया था कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 34 फीसदी तक पहुंच चुकी है और 2013 से लेकर 2018 तक कृषि विकास दर के मामले में मध्यप्रदेश विश्व में नंबर एक रहा है।
हाल ही में जारी हुई ये रिपोर्ट प्रदेश की कृषि की बदहाली की तस्वीर दिखा रही है। कृषि विशेषज्ञ इसे सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी बता रहे हैं। उनका मानना है कि 20 फीसदी से Óयादा विकास दर यदि प्रदेश की कृषि की होती तो यहां के किसानों को कर्ज माफी की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि वे दूसरों को कर्ज देने की हालत में होते।
ये है प्रदेश की कृषि विकास दर :
- 2012-13 : 9.83 फीसदी
- 2013-14 : 2.32 फीसदी
- 2014-15 : 3.63 फीसदी
- 2015-16 : 7.51 फीसदी
- 2016-17 : 10.83 फीसदी
- 2017-18 : 4.05 फीसदी
- 2018-19 : 5.49 फीसदी
ये था शिवराज सरकार का दावा :
तत्कालीन शिवराज सरकार ने दावा किया था कि कृषि विकास के मामले में प्रदेश 2013-2018 तक दुनिया में नंबर एक रहा है। सार्वजनिक तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंचों से कई बार ये दावा किया है। 20 जनवरी 2017 को एक सार्वजनिककार्यक्रम में शिवराज सिंह ने कहा कि लगातार 20 प्रतिशत से Óयादा विकास दर हासिल करने वाला मध्यप्रदेश दुनिया का पहला राÓय है। इससे पहले तत्कालीन राÓयपाल रामनरेश यादव ने 26 जनवरी 2016 को गणतंत्र दिवस समारोह में कहा था कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर पिछले चार सालों से लगातार 20 फीसदी से Óयादा रही है जो कि विश्व में नंबर एक है। तत्कालीन सरकार ने 2016-17 में तो 34.14 फीसदी विकास दर और 2015-16 में 25 फीसदी कृषि विकास दर का दावा किया था।
कृषि विशेषज्ञों का ये दावा :
कृषि विशेषज्ञ और किसान नेता केदार सिरोही कहते हैं कि 20 फीसदी से Óयादा कृषि विकास दर उन्नत खेती का पर्याय मानी जाती है। मध्यप्रदेश में तो खेती उन्नत ही नहीं है। सिरोही कहते हैं कि हम 2013 से ही इस कृषि विकास दर को चुनौती दे रहे हैं। ये सिर्फ उस समय की सरकार ने अफसरों के साथ मिलकर आंकड़ों में हेराफेरी की और किसानों के बीच वाहवाही लूटने की कोशिश की। यदि प्रदेश की विकास दर 20 फीसदी से Óयादा है तो किसान आत्महत्या और पलायन में प्रदेश नंबर एक पर क्यों है। पिछले पांच सालों में किसानों पर बीस हजार करोड़ का कर्ज न चढ़ता। किसान लखपति होता और कर्ज माफी की जगह दूसरों को कर्ज बांट रहा होता।
- शिवराज सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। फर्जी आंकड़ों के जरिए प्रदेश की कृषि विकास दर को विश्व की सबसे ज्यादा विकास दर बताते रहे। हमने जब ये जांच करवाई तो असली विकास दर उनके दावों से बहुत कम निकली। इस मामले में हम जवाबदेही तय करेंगे। झूठे आंकड़ों को दिखाकर किसानों को ठगने वालों को छोड़ेंगे नहीं। - सचिन यादव कृषि मंत्री,मप्र
- सरकार बेसिर-पैर की बातें कर रही है। हमारे समय कृषि विकास देश में सबसे Óयादा रही है। दुनिया की तो हम गणना नहीं करते लेकिन देश में हम सबसे आगे थे। इस सरकार को कुछ समझ ही नहीं है। न उनके पास आंकड़े हैं और न कोई रिकॉर्ड है,अनावश्यक बातें कर रहे हैं।
- गौरीशंकर बिसेन तत्कालीन कृषि मंत्री,मप्र
Updated on:
14 Oct 2019 09:44 am
Published on:
14 Oct 2019 08:16 am
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