
AIIMS Bhopal Dr. Sukhesh Mukherjee Ranked Among the World Top Scientists
AIIMS Bhopal भोपाल के एम्स अस्पताल के खाते में नई उपलब्धि जुड़ गई है। कैंसर व गंभीर बीमारियों पर शोध कर रहे एम्स भोपाल के बायोकेमिस्ट्री प्रोफेसर सुखेश मुखर्जी को साइरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री ने दुनिया के टॉप 5 वैज्ञानिकों में शामिल किया है। यह सम्मान पाने वाले वे देश के एम्स में इकलौते हैं। विश्व के अव्वल 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में वे 77000 नंबर पर हैं।
डॉ. सुखेश ने स्तन कैंसर, खासकर इसके सबसे आक्रामक प्रकार ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (टीएनबीसी) पर शोध किया है। इससे पता चला कि कैंसर शरीर में कैसे विकसित होता है और तेजी से फैलता है। कई बार दवा का असर क्यों कम हो जाता है। इस अध्ययन से स्तन कैंसर की जल्दी पहचान व इलाज से मरीजों को बचाने की संभावना बढ़ती है। इलाज पर होने वाला खर्च व सामाजिक बोझ कम किया जा सकता है।
'साइरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री दुनिया के वैज्ञानिकों, शोधकर्ता, शिक्षाविदों की रैंकिंग और वैज्ञानिक प्रभाव को मापने वाला वैश्विक डिजिटल डेटाबेस और स्वतंत्र एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म है। यह डेटा-एल्गोरिदम पर काम करता है। यह 150 देशों के 1 करोड़ से अधिक वैज्ञानिकों के प्रोफाइल, 5 करोड़ वैज्ञानिक कार्यों का विश्लेषण करता है।
एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) की मेडिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी टीम कैंसर के इलाज और अनुसंधान में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संस्थान द्वारा कई कदम उठाए गए हैं:
कैंसर सर्वाइवर क्लिनिक: मरीजों को सर्जरी या इलाज के बाद भी उचित देखभाल और सहायता प्रदान करने के लिए एम्स भोपाल में एक विशेष 'कैंसर सर्वाइवर क्लिनिक' की शुरुआत की गई है।
उन्नत तकनीक: संस्थान में ट्यूमर को सटीक रूप से नष्ट करने के लिए आधुनिक एलेक्ता लीनियर एक्सेलेरेटर सिस्टम 'वर्सा एचडी' (Versa HD) जैसी विश्वस्तरीय रेडियोथेरेपी मशीनें लगाई गई हैं।
डॉ. सुखेश मुखर्जी एम्स भोपाल के जैव रसायन विभाग में अतिरिक्त प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वे पिछले 17 वर्षों से अध्यापन और अनुसंधान में संलग्न हैं। उनका अकादमिक और अनुसंधान करियर बहुत सक्रिय रहा है। डॉ. सुखेश मुखर्जी ने पीयर-रिव्यू पत्रिकाओं में 85 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भी अपना कार्य प्रस्तुत किया है। डॉ. सुखेश मुखर्जी को 2008 में "एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्स ऑफ इंडिया" से सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का पुरस्कार मिला। उन्हें अगस्त 2009 में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित न्यूरोकेमिस्ट्री सम्मेलन में भाग लेने के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा फैलोशिप और 2011 में एक अन्य एएसीसी फैलोशिप प्राप्त हुई।
डॉ. सुखेश मुखर्जी नियमित रूप से अपने विभाग की ओर से स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों को प्रशिक्षण देते हैं और स्वयं भी उन्नत जीव विज्ञान, जैव रसायन और आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। हाल ही में उन्हें ब्रिटेन की 230 साल पुरानी लिनियन सोसाइटी की फेलोशिप से सम्मानित किया गया है और साथ ही 2020 में उन्हें भारत की राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी (एमएएमएस) और ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ पब्लिक हेल्थ के सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया है। डॉ. सुखेश मुखर्जी रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी (ब्रिटेन) के भी सदस्य हैं। उनकी शोध रुचि क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री, प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी और चयापचय संबंधी रोगों के जैव रासायनिक पहलुओं में है।
Updated on:
04 Jun 2026 06:19 am
Published on:
04 Jun 2026 06:19 am
