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एम्स की नई तकनीक अब दिमाग की महीन नसों का भी होगा पोस्टमार्टम

एम्स भोपाल में नई तकनीक की खोज की है। जिसके जरिए अब दिमाग की महीन नसों (सर्कल ऑफ विलिस) का भी पोस्टमार्टम हो सकेगा। इसके जरिए दिमाग में लगी चोट और उससे मौत की सही जानकारी मिल सकेगी।

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भोपाल. एम्स भोपाल में नई तकनीक की खोज की है। जिसके जरिए अब दिमाग की महीन नसों (सर्कल ऑफ विलिस) का भी पोस्टमार्टम हो सकेगा। इसके जरिए दिमाग में लगी चोट और उससे मौत की सही जानकारी मिल सकेगी। एम्स प्रबंधन ने दावा किया है कि दुनिया में यह पहला मौका होगा जब सर्कल ऑफ विलिस का पोस्टमार्टम किया जाएगा। यह तकनीक फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग में एमडी कोर्स कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉ. सिबी विजयकुमार ने इजाद की है। उनके इस रिसर्च पेपर को प्रतिष्ठित अमेरिकन जर्नल ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड पैथोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

क्या होता है सर्कल ऑफ विलिस

दिमाग में रक्त प्रवाह करने वाली वाहिकाएं बहुत ही महीन होती हैं। जो एक गुच्छे के रूप में दिमाग के आंतरिक हिस्से से चिपकी रहती हैं। इन गुच्छों के कारण ही इसे सर्कल ऑफ विलिस कहा जाता है।

मिलेगी दिमाग पर हुए असर की सटीक जानकारी
एम्स से मिली जानकारी के अनुसार यदि व्यक्ति की मौत स्ट्रोक या अन्य दिमागी बीमारी के कारण होती है। इसके अतिरिक्त व्यक्ति के गिरने और दिमाग में चोट लगने से मौत होती है। इस स्थिति में दिमाग पर हुए असर की सटीक जानकारी नई तकनीक से पता की जा सकती है। यह भी पता चल सकेगा कि किस हिस्से में खून का थक्का जमा या अन्य समस्याएं हुई। इस तकनीक में फोटोग्राफिक एविडेंस मिलते हैं।