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एम्स द्वितीय दीक्षांत समारोह : 833 छात्रों को मिली डिग्री

आमजन के जन औषधी केंद्रों से 3 हजार करोड़ व आयुष्मान योजना से 50 हजार करोड़ रुपए बचें - डॉ. पवार

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भोपाल. एम्स का द्वितीय दीक्षांत समारोह रविवार को आयोजित किया गया। इस समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने नए चिकित्सकों से सेवाभाव और समर्पित भावना के साथ कर्तव्य निर्वहन का आह्वान किया। जिससे देश के हर नागरिक को इलाज मिले, सिर्फ उनको नहीं जिनके पास खर्च उठाने की क्षमता हो। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक पड़ाव पूरा होने के बाद समाज के हित में सेवाएं करने वाले जिम्मेदारी से भरे दूसरे पड़ाव की शुरुआत है। ऐसे शोध करें जिनसे दुनिया भर में देश का नाम हो। हमसे दूसरे देश की संस्थान एमओयू के लिए आएं। इन्हीं सब के लिए सरकार एम्स में पढ़ने वाले एक बच्चे पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा का खर्च करती है। देश में अब तक जन औषधी केंद्रों से तीन हजार और आयुष्मान योजना से 50 हजार करोड़ रुपए आमजन के बचें हैं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि आप सभी को डिग्री मिल रही हैं। मगर सही डिग्री और सर्टिफिकेट तब मिलेगा, जब आपकी सेवा से खुश होकर मरीज आपके पास आएंगे और दुआएं देंगे।

इस अवसर पर डॉ. पवार ने 150 बेड वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भूमिपूजन व शिलान्यास किया। साथ ही ह्यूमन मिल्क बैंक, इसीएमओ मशीन, 27 बिस्तरों के एनआईसीयू, एआरटी सेंटर ओरी कैथ लैब जैसी सुविधाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर भोपाल महापौर मालती राय, भोपाल एम्स के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र कुमार गुप्ता और निदेशक डॉ. अजय सिंह भी उपस्थित रहे।

2013 से 2020 बैच के 833 स्टूडेंट्स ने मानव कल्याण की शपथ ली

दीक्षांत समारोह में 833 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। इनमें साल 2013 से 2017 तक के एमबीबीएस, साल 2015 से 2018 तक के बीएससी (नर्सिंग) और साल 2017 से 2020 तक के एमडी-एमएस-एमडीएस के छात्रों को डिग्री दी गई। जिसमें 64 गोल्ड मेडलिस्ट शामिल हैं। इनमें 40 एमबीबीएस और 24 बीएससी नर्सिंग कोर्स के गोल्ड मेडलिस्ट हैं। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह और डीन प्रो. राजेश मलिक ने सभी को शपथ दिलाई कि वे किसी स्वार्थ, सांसारिक वस्तु या लाभ की पूर्ति के लिए नहीं बल्कि मानव कल्याण के लिए मरीजों की सेवा करेंगे।

गोल्ड मेडलिस्ट बोले शिक्षकों की अहम भूमिका रही

-साइंटिस्ट बनना चाहते थे.....

सबसे अधिक 9 गोल्ड मेडल्स एमबीबीएस 2017 बैच के डॉ अखिल वेणुगोपाल को मिले। उन्हों ने बताया कि वह पहले साइंटिस्ट बनना चाहते थे। मगर मेथ्स वीक होने के चलते वे मेडिकल लाइन में आ गए। सफलता के लिए मेहनत के साथ बेहतर मार्गदर्शन भी जरूरी है। वर्तमान में एम्स दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहें हैं।

-नए छात्रों को सबसे पहले लक्ष्य बनाना चाहिए.....

एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान डॉ. श्वेता शर्मा को कुल 8 गोल्ड मिले हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल समय से ही डाक्टर बनने का सपना लेकर तैयारी में जुटी रही। नए छात्रों को सबसे लक्ष्य बनाने चाहिए और उसी दिशा में फोकस करें। यहां के शिक्षकों ने हमेशा आत्म विश्वास बढ़ाया। वर्तमान में एम्स दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहीं हैं।