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प्रवीण श्रीवास्तव@ भोपाल
शहर के पांच लाख से ज्यादा गैस पीडि़तों के लिए खुश खबर है। भोपाल मेमोरियल अस्पताल (बीएमएचआरसी) मंे लंबे समय से इलाज की बाट जोह रहे गैस पीडि़तों को अब एम्स में इलाज मिलेगा। यही नहीं इसके लिए उनसे किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। एम्स और बीएमएचआरसी के मर्ज होने के बाद गैस पीडि़तों को यह सुविधा मिलने लगेगी।
गौरतलब है कि बीएमएचआरसी से डॉक्टरों के पलायन और विभागों के बंद होने से गैस पीडि़तों का इलाज बंद हो गया था। एेसे में बीएमएचआरसी को फिर से खड़ा करने पर इसे एम्स के साथ मर्ज करने का विचार किया गया था। इस पर केन्द्र सरकार की सहमति के बाद इस विचार पर काम करना शुरू कर दिया गया। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं। इन कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
एम्स से अलग होगा बजट
मिली जानकारी के मुताबिक यह आम मर्जर नहीं होगा, जिसमें दो सरकारी कंपनियों का पूरी तरह विलय हो जाता है। अधिकारियों के नजर में यह सेमी मर्जर होगा जिसमें आरआर रूल्स से लेकर अन्य नियम तो एम्स के होंगे, लेकिन बजट पूरी तरह से अलग होगा।
एम्स के डॉक्टर लेंगे ओपीडी
मर्ज होने के बाद एम्स के साथ ही बीएमएचआरसी में भी डॉक्टरों की भर्तियों की जाएंगी। हालांकि, जब तक डॉक्टर नहीं आते तब तक एम्स के दो-दो डॉक्टर बीएमएचआरसी मंे सप्ताह में दो दिन ओपीडी में आएंगे, जहां से जरूरत पडऩे पर एम्स रैफर किया जाएगा।
बीएमएचआरसी से डॉक्टरों के पलायन और विभागों के बंद होने से गैस पीडि़तों का इलाज बंद हो गया था। एेसे में बीएमएचआरसी को फिर से खड़ा करने पर इसे एम्स के साथ मर्ज करने का विचार किया गया था। इस पर केन्द्र सरकार की सहमति के बाद इस विचार पर काम करना शुरू कर दिया गया। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं। इन कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जो भी प्रक्रिया चल रही है वो बहुत ही धीमी है। कोर्ट ने जल्द से जल्द बीएमएचआरसी के आरआर रूल्स तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद डीएचआर ने डेढ़ साल में आधे नियम ही तैयार किए। दोनों संस्थानों के तर्ज होने की प्रक्रिया तो चल रही है, इससे गैस पीडि़तों को खासा फायदा होगा।
- पूर्णेन्दु शुक्ला, सदस्य मॉनिटरिंग कमेटी
Published on:
09 Dec 2017 09:21 am
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