
एयरपोर्ट पर निर्धारित समय से पहले पहुंचें, नहीं तो कन्फर्म टिकट के बाद भी फ्लाइट में सीट नहीं मिलेगी
भोपाल. त्योहारी सीजन में फ्लाइट का कन्फर्म टिकट होने के बावजूद एयरपोर्ट देरी से पहुंचना आपको परेशानी में डाल सकता है। दरअसल, डीजीसीए से विमानन कंपनियों को दस फीसदी ओवर टिकटिंग की अनुमति मिली है। त्योहारों में यात्रियों की संख्या अधिक होने पर कंपनियां ओवर बुकिंग तो कर लेती हैं, लेकिन जैसे ही फ्लाइट फुल होती है तो बचे कंन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को बोर्डिंग पास जारी नहीं किए जाते। हालांकि कंपनियां इन यात्रियों को भी गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करती हैं, लेकिन इन सब में यात्रियों का तय शेड्यूल बिगड़ जाता है। इस व्यवस्था से परेशान हुए कई यात्री मामले को उपभोक्ता फोरम ले गए हैं।
50 मिनट पहले पहुंचे, लेकिन नहीं चढऩे दिए फ्लाइट में
निशांत सिंह पिछले दिनों बिजनेस मीटिंग के लिए भोपाल से दिल्ली जा रहे थे। एक सप्ताह पहले टिकट बुक किया था। बोर्डिंग पास जारी करने के लिए तय समय से 50 मिनट पहले एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन उन्हें फ्लाइट में नहीं चढऩे दिया गया। कारण बताया कि फ्लाइट फुल हो गई है। इसके बाद निशांत को मीटिंग कैंसिल करनी पड़ी। इसी तरह दिल्ली से गुवाहाटी जा रहे 20 यात्रियों को भी कन्फर्म टिकट होने के बाद भी बोर्डिंग पास नहीं दिया गया था।
10 फीसदी तक होती है ओवर बुकिंग
जानकारी के मुताबिक विमान कंपनियों को फ्लाइट में 10 फीसदी तक ओवर बुकिंग की इजाजत होती है। इसके लिए उन्हें डीजीसीए ने अनुमति मिली हुई है। विमानन कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि हर कंपनी के पास दैनिक यात्रियों का आंकड़ा होता है, जिसके आधार पर वह अनुमान लगाती है कि किस सेक्टर में औसतन कितने यात्री सफर करते हैं। इसी आधार पर ओवर बुकिंग होती है। सामान्य दिनों में कम यात्री ही सफर करते हैं, लेकिन त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या बढऩे पर ऐसी स्थिति बनती है कि ओवर बुकिंग के चलते तय सीट से अधिक यात्री एयरपोर्ट पर यात्रा करने पहुंच जाते हैं। ऐसे में विमान कम्पनियां 'पहले आएं, पहले पाएंÓ के आधार पर यात्रियों को सीट आवंटित करती है।
वेब चेक-इन करें, एयरपोर्ट पर 2 घंटे पहले पहुंचे
एविएशन एक्सपर्ट ने बताया कि वेब चेक-इन के जरिए यात्री ओवर बुकिंग होने के बावजूद भी कंफर्म सीट प्राप्त कर सकता है। बशर्ते वह विमान के निर्धारित समय से 45 मिनट पहले एयरपोर्ट पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा व सुरक्षा जांच करा ले। कंफर्म टिकट के बावजूद भी सीट नहीं मिलने के केस हमेशा काउंटर से बोर्डिंग पास लेने की स्थिति में होते हैं। हालांकि एक्सपर्ट के मुताबिक यात्री को डोमेस्टिक फ्लाइट पकडऩे के लिए निर्धारित समय से 2 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना चाहिए। 45 मिनट पहले बोर्डिंग पास काउंटर बंद कर दिया जाता है, इसके बाद यात्रियों को प्रवेश नहीं मिलता है।
'इक्युपमेंट चेंज सिचुएशनÓ में सबसे ज्यादा परेशानी
कई बार 150 सीटर रेग्युलर बोइंग उपलब्ध नहीं हो पाता है ऐसी स्थिति में विमान कंपनियां यात्रियों को एटीआर में शिफ्ट करती हैं जिसकी क्षमता अधिकतम 78 सीटर होती है। इसे टेक्निकल भाषा में इसे 'इक्यूपमेंट चेंज सिचुएशनÓ कहते हैं, इस स्थिति में सिर्फ शुरुआती 78 यात्रियों को ही बोर्डिंग पास जारी किया जाता है जबकि अन्य यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। हालांकि कई बार विमान कपंनियां आपस में अनुबंध करती हैं, ओवर बुकिंग की स्थिति में वह दूसरी कंपनी के विमान में सीट खाली होने पर यात्रियों को शिफ्ट करते हैं।
डीएनबी की स्थिति में यात्री के पास यह हैं अधिकार
डीएनबी (डिनायड बोर्डिंग) के केस में डीजीसीए ने यात्रियों को भी कुछ अधिकार दिए हैं। इसके तहत वैकल्पिक फ्लाइट का इंतजाम 1 घंटे के अंदर ही करने का नियम है, ऐसा करने पर यात्री को किसी भी तरह के हर्जाना नहीं मिलता है। वैकल्पिक फ्लाइट 24 घंटे के अंदर उपलब्ध कराई गई तो एक तरफ के बेसिक किराए की 200 प्रतिशत (एयरलाइन फ्यूल चार्ज जोड़कर) राशि चुकाने का नियम है। 24 घंटे बाद की फ्लाइट उपलब्ध कराने पर बेसिक किराए के साथ 400 प्रतिशत राशि चुकानी होती है। वहीं अगर यात्री वैकल्पिक फ्लाइट नहीं चाहता है तो विमान कंपनी को टिकट की रकम के रिफंड के साथ किराए की 400 प्रतिशत राशि बतौर हर्जाना चुकानी होगी।
कभी कभार ही आती है यह स्थिति
ओवर बुकिंग में यात्रियों को परेशान होना पड़े यह स्थिति कभी-कभार ही आती है। ऐसा होने पर विमान कंपनियां उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करा कर देती हैं। इसकी बाकायदा गाइडलाइन तय है। किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए यात्रियों को निर्धारित समय पर एयरपोर्ट पहुंचना चाहिए।
- आरके मल्होत्रा, स्टेशन मैनेजर, एयर इंडिया
Published on:
14 Oct 2019 02:30 am
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