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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन, पचमढ़ी अभयारण्य से हटेगी ‘हवाई पट्टी’ और ‘सरकारी बंगले’

MP News: सरकार ने अभयारण्य केवल सरकारी जमीन और उस पर बने निर्माण कार्यों को बाहर किया है इसलिए आम आदमी को सीधे कोई लाभ नहीं होंगे।

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Pachmarhi Sanctuary (Photo Source - Patrika)

Pachmarhi Sanctuary (Photo Source - Patrika)

MP News: आखिरकार पचमढ़ी के राजा भभूत सिंह अभयारण्य में बनाई हवाई पट्टी, अस्पताल, सरकारी बंगले, होटल, पार्क, प्रयोगशालाएं, सर्किट हाउस को बाहर कर दिया है। 395.939 हे. क्षेत्र को बाहर किया है। इसमें सबसे बड़ा क्षेत्र सड़क, नाली, झील, हवाई पट्टी, नर्सरी आदि शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर उक्त क्षेत्र को 1977 में बने अभयारण्य से बाहर किया है। तब पचमढ़ी में कई निर्माण हो चुके थे, तभी इन्हें अभयारण्य क्षेत्र से बाहर करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतना ही नहीं, अभयारण्य के अंदर सरकारी लैंड-बैंक पर हवाई पट्टी, सरकारी बंगले, रोड़-नाली व अन्य काम होते रहे। इस बीच अभयारण्य व सरकारी निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाए गए। यहां से मिली गाइडलाइन के आधार पर अभयारण्य से उक्त क्षेत्रों को बाहर कर दिया है।

कैबिनेट में दो बार लाना पड़ा प्रस्ताव

हाल में सरकार ने पचमढ़ी अभयारण्य का नाम बदलकर आदिवासी राजा भभूत सिंह के नाम पर किया है। राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों से मुकाबला किया था। पहले सरकार उक्त प्रस्ताव दो बार कैबिनेट में लेकर आई। सबसे पहले 395 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य से बाहर करने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया, चर्चा के बाद उसे स्वीकृति भी दी। सूत्रों के मुताबिक उक्त प्रस्ताव में कुछ क्षेत्र बाहर निकाले जाने से छूट गए। इसलिए दोबारा प्रस्ताव में 395.939 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य से बाहर करने को मंजूरी दी गई।

वन्यप्राणी नियमों के कारण अटक रहे थे काम

चूंकि अभयारण्य के अंदर निर्माण कार्य प्रतिबंधित होते हैं। विषम परिस्थितियों में ही अनुमति मिलती है। लेकिन पचमढ़ी के अभयारण्य में 48 साल से रोड, नाली, बंगले, नर्सरियों, पार्कों, सर्किट हाउस के अंदर काम हो रहे थे। समय के साथ अभयारण्य से जुड़े कड़े होते गए, निर्माण की अनुमति नहीं मिलने लगी तो काम अटकने लगे। नतीजा, सरकार को ऐसे क्षेत्रों को अभयारण्य से बाहर करने का निर्णय लेना पड़ा।

यह होगा फायदा

सरकार ने अभयारण्य केवल सरकारी जमीन और उस पर बने निर्माण कार्यों को बाहर किया है इसलिए आम आदमी को सीधे कोई लाभ नहीं होंगे।

सड़क, नाली, बंगले का उपयोग पचमढ़ी पहुंचने वाले पर्यटक करते हैं। ये झील, तालाब, नर्सरियां व पार्कों में भी जाते है। इनका रख-रखाव आसान होगा। इससे अभयारण्य आने वाले पर्यटकों को लाभ होगा।

एक नजर यहां पर....

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर फैसला

उक्त क्षेत्र को 1977 में बने अभयारण्य से बाहर

सरकार ने पचमढ़ी अभयारण्य का नाम बदला

सरकार उक्त प्रस्ताव दो बार कैबिनेट में लेकर आई

अभयारण्य आने वाले पर्यटकों को लाभ होगा