
cancer treatment प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
AIIMS Bhopal: स्वास्थ्य सेवाओं के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच भोपाल में विभिन्न रोगों के परंपरिक इलाज से दो कदम आगे एक ही रोग के प्रत्येक रोगी का अलग उपचार शुरू किया जाएगा। इसके तहत हर रोगी की शारीरिक स्थिति, उसके जीन (डीन), जीवनशैली, पर्यावरण और बीमारी के प्रकार के आधार उपाचर किया जाता है। इस आधुनिक चिकित्सा पद्धति को प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है। इसके तहत कैंसर, हृदय रोगों, डायबिटीज और मनोरोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है। एम्स भोपाल में एक वर्ष से ट्रॉयल चल रहा है। जीन आधारित जांच व उन्नत डायग्नॉस्टिक तकनीकों को धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है।
मान लिया जाए कि दो मरीजों को कैंसर है, लेकिन दोनों के जीन अलग हैं। इसलिए एक ही दवा दोनों पर समान असर नहीं करती। प्रिसिजन मेडिसिन में जीनकी जांच के आधार पर हर मरीज के लिए अलग और सही दवा का चुनाव किया जाता है।
जीनोमिक्स : मरीज के डीएनए की जांच कर बीमारी से जुड़े जीन बदलाव पहचाने जाते हैं।
बायोमार्करः शरीर के संकेत का विश्लेषण कर पता करते हैं कि कौन-सी दवा या थेरेपी सबसे असरदार होगी।
डेटा व तकनीकः एआइ और डेटा के विश्लेषण के आधार पर सटीक इलाज तय किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पद्धति कैंसर और हृदय रोग जैसे गंभीर और दुर्लभ रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। कैंसर उपचार में इसका असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। अब पारंपरिक कीमोथेरेपी के बजाय टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे विकल्प सामने आ रहे हैं।
एम्स भोपाल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. सुखेस मुखर्जी ने बताया कि संस्थान प्रिसिजन मेडिसिन सेल अभी थर्मो जीनोमिक्स, मनोरोग और हृदय रोग पर काम कर रहा है। शरीर में डीएनए से बनने वाले रोगियों के जीनोम और उसके आनुवंशिक पदार्थ और इससे संबंधित जानकारियों के प्रयोग का अध्ययन चल रहा है। 30 मार्च को एम्स में प्रिसिजन मेडिसिन इन प्रैक्टिस विषय पर आयोजित सेमीनार में देशी-विदेशी विशेषज्ञों ने जीनोमिक्स, कैंसर, हृदय रोग, मनोरोग और फार्माकोजीनोमिक्स पर गहन विचार मंथन कर इस पद्धति से उपचार शुरू करने की संभावनाएं तलाशीं।
भोपाल के सरकारी जेपी अस्पताल में भी अब मल्टी- ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर-टीबी) टीबी के साथ ही और फेफड़े एंव श्वास रोगों की सटीक जांच और प्रभावी उपचार होगा। लंग कैंसर और ट्यूमर का पता लगाने के लिए बायोप्सी जांच भी जिला अस्पताल में की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में नई ब्रोंकोस्कोपी मशीन लगाई जा रही है।
अस्पताल में जांच कर जटिल श्वास रोगों और एमडीआर टीबी का पता लगाने की सुविधा नहीं है। नई ब्रोंकोस्कोपी मशीन को स्थापित किया जा रहा है, अगले मंगलवार तक जांच शुरू होगी। अस्पताल में आयुष्मान कार्ड पर यह जांच नि:शुल्क होगी। अन्य रोगियों से न्यूनतम शुल्क लिया जाएगा।
Updated on:
03 Apr 2026 10:45 am
Published on:
03 Apr 2026 10:45 am
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