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MP के सभी सरकारी दफ्तर 2030 तक साैर उर्जा से ​हाेंगे राेशन

- बड़ा कदम: वर्ष 2027 तक 60 हजार करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य, इससे सूबे में 50 हजार नौकरियां सृजित होने का अनुमान

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भोपाल@जितेंद्र चौरसिया

देश-प्रदेश में कोयले की कमी को देखते हुए मध्यप्रदेश ने सूरज की रोशनी से बिजली संकट दूर करने का फैसला किया है। इसके तहत बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने अगले 8 वर्षों यानी वर्ष 2030 तक में प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों को सौ फीसदी सौर ऊर्जा पर शिफ्ट करना तय किया है।

खास बात यह है कि 2030 तक के लिए ग्रीन-एनर्जी का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है। वर्ष 2027 तक 60 हजार करोड़ रुपए का निवेश सौर ऊर्जा में होगा, जिससे 50 हजार लोगों को नई नौकरी मिलेगी। सरकार ने इसके लिए नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 तैयार करके पूरा रोडमैप तय किया है। इसके तहत ही लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं।

11,000 मेगावाट मप्र की मांग

22,500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता के दावे

30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

आगामी वर्षों में मध्यप्रदेश के लक्ष्य:

वर्ष सीमा- सरकारी दफ्तर शिफ्ट- कुल खपत में- निवेश
: 2024 तक -20 फीसदी -20 फीसदी -19 हजार करोड़
: 2027 तक -50 फीसदी -30 फीसदी -60 हजार करोड़
: 2030 तक -100 फीसदी -50 फीसदी -अभी तय नहीं

यह है वजह...

50 फीसदी रखा है लक्ष्य-

मप्र ने वैकल्पिक ऊर्जा के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दूरगामी रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत पहले धीरे-धीरे सौर ऊर्जा को बढ़ाया जाएगा। इसके लिए निजी निवेशकों के जरिए निजी सेक्टर में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएंगे। दिलचस्प ये है कि मध्यप्रदेश ने 2024 तक 4 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा को निर्यात करने की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कॉप-21 सम्मेलन में कार्बन वृद्धि कम करने का लक्ष्य तय किया है। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन की घोषणा की है। इसके तहत भारत में राज्य के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें मध्यप्रदेश ने इस क्षेत्र में देश में अग्रणी रहने के लिए हब बनने की दिशा में काम शुरू किया है। इस कारण मध्यप्रदेश बड़े लक्ष्य रखकर उस पर बढ़ रहा है। इससे मध्यप्रदेश को भी नेट-जीरो कार्बन फुटप्रिंट प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इसलिए मध्यप्रदेश ने 2030 तक प्रदेश की कुल बिजली खपत का 50 प्रतिशत नवकरणीय ऊर्जा से करने का लक्ष्य रखा है।

लक्ष्यों की पूर्ति ऐसे-
मप्र ने वैकल्पिक ऊर्जा के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दूरगामी रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत पहले धीरे-धीरे सौर ऊर्जा को बढ़ाया जाएगा। इसके लिए निजी निवेशकों के जरिए निजी सेक्टर में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएंगे। दिलचस्प ये है कि मध्यप्रदेश ने 2024 तक 4 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा को निर्यात करने की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

सरकारी दफ्तर इसलिए अहम: प्रदेश में 2030 तक सौ फीसदी सरकारी दफ्तरों को सौर ऊर्जा पर शिफ्ट करने का लक्ष्य है। ये अहम है, क्योंकि अब भी सरकारी दफ्तरों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालांकि राजभवन, मंत्रालय सहित अन्य जगहों पर यह अपेक्षाकृत सफल नहीं हो पाया है। नई रूफटॉप पॉलिसी के तहत इस पर काफी काम हुआ है।