
मोदी लहर में भाजपा के मिले थे 54.8 फीसदी वोट, फिर भी कांग्रेस के 57.1 फीसदी का नहीं टूटा था रिकार्ड
भोपाल. 17वीं लोकसभा चुनाव के लिए देश में बिगुल बज गया है। मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं जबकि अविभाजित मध्यप्रदेश में लोकसभा की 40 सीटें थी। साल 2000 में मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग करके नया राज्य बनाया गया था। उसके बाद से मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 और छत्तीसगढ़ में लोकसभा की 11 सीटें हैं। मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहा है। यहां कभी भाजपा को बढ़त मिली तो कभी कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा। मध्यप्रदेश में भाजपा का वोट शेयर 2014 में सबसे ज्यादा बढ़ा। बता दें कि 2014 में देश में मोदी लहर थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर से भाजपा चुनाव लड़ रही है तो कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव हो रहे हैं।
1984 का लोकसभा चुनाव
इस समय मध्यप्रदेश में लोकसभा की 40 सीटें थी। इस चुनाव में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। कांग्रेस ने 40 की 40 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को इस चुनाव में 30 फीसदी तो कांग्रेस को 57.1 फीसदी वोट मिले थे। 36 सीटों पर भाजपा दूसरे स्थान पर थी। 1984 में के चुनाव पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे। इस लहर में खुद अटल बिहारी वाजपेयी भी अपना चुनाव हार गए थे।
1989 के चुनाव में भाजपा की वापसी
1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मध्यप्रदेश में जबरदस्त वापसी की थी। इस बार भाजपा को 39.7 और कांग्रेस को 37.7 फीसदी वोट मिला था। भाजपा ने 27 तो कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में यहां से जनता दल के 4 और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।
1991 में बसपा ने खोला था खाता
1991 के चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी की थी लेकिन इस बार भी लड़ाई भाजपा के साथ ही थी। बड़ी बात थी कि इस बार के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने मध्यप्रदेश में अपनी जीत का खाता खोला था। इस बार कांग्रेस को 45.3 और भाजपा को 41.9 फीसदी वोट मिले थे। वहीं, बसपा को प्रदेशभर में 3.5 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी को 12 और कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली थी।
1996 में बढ़ा भाजपा का वोट बैंक
प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल की थी। इस बार भाजपा को यहां से 41.3, कांग्रेस को 31 फीसदी वोट मिला था। वहीं, बसपा का जनाधार बढ़ा था और इस बार बसपा प्रदेश में 2 सीटों पर जीती थी। इस चुनाव में बसपा का वोट शेयर 8.2 फीसदी था। भाजपा को 27 सीटों पर कांग्रेस को 8 सीटों पर जीत मिली थी।
1998 में भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई
1998 में देश में लोकसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भाजपा ने 30 सीटों पर तो कांग्रेस ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को वोट प्रतिशत 45.7 और कांग्रेस का वोट प्रतिशत 39.4 फीसदी था।
1999 का लोकसभा चुनाव
इस बार के चुनाव में भी भाजपा का ही दबदबा रहा। भाजपा ने यहां 46.6 तो कांग्रेस ने 43.9 फीसदी वोट हासिल किया था। इस चुनाव में अन्य किसी भी पार्टी या निर्दलीय को जीत नहीं मिली थी।
2004 का चुनाव
अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में देश में तीन नए राज्यों का गठन किया गया था। मध्यप्रदेश को तोड़कर छत्तीसगढ़ बनाया गया था। विभाजन के कारण मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें रह गईं जबकि बाकि 11 सीटें छत्तीसगढ़ में चलीं गई थीं। तब से प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं। 2004 में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों के लिए वोटिंग हुई थी। प्रदेश के 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा को 25 सीटें मिली थीं तो कांग्रेस को 4 सीटें। भाजपा का वोट शेयर 48.1 फीसदी था जबकि कांग्रेस का 34.1 फीसदी था।
2009 का लोकसभी चुनाव
इस चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की थी। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को 12, भाजपा को 16 और बसपा को 1 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा का वोट शेयर 43.4 और कांग्रेस का वोट शेयर 40.1 फीसदी था।
2014 में मोदी की थी लहर
2014 के लोकसभा चुनाव में देश में मोदी लहर थी। केन्द्र में पहली बार भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इस चुनाव में भाजपा ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी तो कांग्रेस को केवल दो सीटों पर ही जीत मिली थी। था भाजपा का वोट प्रतिशत पहली बार 50 फीसदी के ऊपर था। इस चुनाव में भाजपा को 54.8 फीसदी कांग्रेस को 35.4 फीसदी वोट मिले थे।
Updated on:
31 Mar 2019 11:08 am
Published on:
31 Mar 2019 11:00 am
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