
anant mandi initiative for Organic food by Bhopal based youngsters
विकास वर्मा, भोपाल। राजधानी में लोग ऑर्गेनिक फूड खाना तो चाहते हैं लेकिन मार्केट में उसकी उपलब्धता नहीं होने के कारण वे पेस्ट्रीसाइड युक्त सब्जियां या अन्य खाद्य पदार्थ खाने पर मजबूर होते हैं। हालांकि शहर में कुछ ऐसे भी स्थान हैं जहां ऑर्गेनिक फूड उपलब्ध है लेकिन उसके दाम काफी इतने अधिक होते हैं कि वो आम आदमी की पहुंच से दूर होता है। इसे देखते हुए शहर की दो युवतियों ने एक अनोखी पहल 'अनंत मंडी' की शुरुआत की है। इसके तहत वह जैविक खेती करने वाले किसानों को एक मंच उपलब्ध कराते हैं जहां वह महीने के हर दूसरे व आखिरी रविवार को अपना सामान बिना किसी बिचौलिए के आम उपभोक्ता को बेचते हैं। यह मंडी राजधानी स्थित गांधी भवन परिसर में आयोजित होती है।
अंनत मंडी की फाउंडर पियूली घोष (24) और सौम्या जैन (28) बताती हैं कि इस मंडी को पिछले साल 31 मार्च को शुरू किया गया था। यहां करीब 20 से अधिक जैविक खेती करने वाले किसान आते हैं। इस मंडी में पूर्णत: जैविक उत्पाद ही होते हैं, इसमें सब्जी, दाल, अनाज, शहद, तेल, मसाले, डेयरी उत्पाद, खाद, हर्बल मेडिसिन और पर्सनल केयर उत्पाद भी होते हैं। इन किसानों से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
आरजे, डेटिंस्ट और आईटी प्रोफेशनल्स भी हैं समूह में
पियूली बताती हैं कि बैंगलूरू से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मेरे जेहन में अंनत मंडी का विचार आया। मैं और सौम्या एक कार्यक्रम के दौरान मिले और दोनों ने साथ मिलकर इसमें काम करने का निर्णय लिया। उस वक्त सौम्या भी एमबीए करने के बाद नौकरी कर रही थी, बाद में उसने नौकरी छोड़ दी। धीरे-धीरे हमारी टीम में और भी लड़कियां जुड़ीं, जो अलग-अलग बैकग्राउंड से हैं लेकिन समाज के लिए कुछ करने का जज्बा है। टीम की एक सदस्य अनुप्रिया सोनी हैं जो पेशे से डेंटिस्ट हैं। इसके अलावा सान्या आचार्य रेडियो जॉकी हैं, आरती रायगर आईटी प्रोफेशनल हैं और श्रेया पटेल कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। सभी अपने पेशे के अलावा अनंत मंडी के संचालन में भी सहयोग देती हैं। गु्रप की सभी सदस्य 22 से 30 वर्ष तक की हैं।
हमारी भूमिका सिर्फ किसान और उपभोक्ता के बीच ब्रिज की
पियुली बताती हैं कि अभी अनंत मंडी सिर्फ जैविक खेती करने वाले किसानों और उपभोक्ताओं के बीच ब्रिज का कार्य करती है। इसमें किसी भी तरह का कमर्शियल मॉडल नहीं है, लेकिन हर बार मंडी लगाने जो 1500 से 2000 रुपए का खर्च होता है उसे निकालने के लिए हम किसानों से अपनी क्षमता के अनुसार योगदान करने को कहते हैं, इसके अलावा क्राउड फंडिंग के जरिए भी इस खर्चे को पूरा करने का प्रयास करते हैं।
सबकी रसाई और स्वैप सेल जैसे प्रयोग भी
अनंत मंडी में हमने दो और प्रयोग भी किए हैं जो लोगों को काफी पसंद आए हैं। इसमें पहला प्रयोग सबकी रसोई है, यहां कोई भी खाना बनाने का शौकीन व्यक्ति हेल्दी फूड बनाकर ला सकता है और उसे यहां बेच सकता है। बस यह डिश जैविक उत्पादों से बनी होनी चाहिए। इसके अलावा हमने यहां स्वैप सेल (अदला-बदली) की भी शुरुआत की है, जहां आप अपना कोई भी गैर जरूरी सामान छोड़कर उसकी एवज में अपनी जरूरत का सामान ले जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर आप अपनी कोई भी पुरानी टी-शर्ट को यहां देकर यहां मौजूद कोई किताब ले सकते हैं।
Published on:
18 Mar 2020 09:46 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
